कोरोना वायरस वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ख़तरे क्या हैं ? जानिए इसके नुकसान...

कोरोना वायरस की महामारी पर चल रही बहसों में एक सवाल अक्सर उठता है कि इस बीमारी की दवा क्या है, इसका इलाज क्या है. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्वीन दोनों की ही रासायनिक संरचना और मेडिकल इस्तेमाल अलग-अलग है. हालांकि कोविड-19 की बीमारी में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की उपयोगिता को लेकर तरह-तरह दावे किए जा रहे हैं और इस दिशा में कुछ रिसर्च भी हुए हैं.पर पैन अमरीकन हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (पाहो) ने छह अप्रैल को चेतावनी दी थी कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर किए जा रहे दावों को सही साबित करने वाला कोई ठोस सबूत अभी तक सामने नहीं आया है. 
जब तक कोई ठोस सबूत न मिल जाए 'पाहो' ने अमरीका की सरकार से इसके इस्तेमाल से परहेज करने की अपील की है. संस्था ने कहा है,"मौजूदा दिशानिर्देशों और प्रक्रियाओं का पालन किए बगैर क्लोरोक्वीन या हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल के विपरीत प्रभाव हो सकते हैं. इससे व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ सकता है और यहां तक कि उसकी मौत भी हो सकती है."

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के साइड इफेक्ट्स
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर 'पाहो' की चेतावनी को एक तरफ़ रख भी दें तो अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर साफ़ शब्दों में ऐसे संकेत दिए हैं कि कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी कोविड-19 का इलाज इस दवा से हो सकता है.यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन के मुताबिक़ जो मरीज़ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए करते हैं, उनमें साइड इफेक्ट्स के तौर पर सिर दर्द, चक्कर, भूख न लगना, पेट ख़राब होना, डायरिया या पेट में दर्द, उल्टी, त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ने की शिकायत देखी गई है.

सेंटर फ़ॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन एक ऐसी दवा है जो मलेरिया के रोगियों के लिए कारगर रहती है. मलेरिया के मरीज खाने के साथ इस दवा का इस्तेमाल करके इसके साइड इफेक्ट्स से बच सकते हैं. हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसके दूसरे प्रभावों को लेकर आगाह करते हैं जो जानलेवा साबित हो सकते हैं. अमरीका के मेयो क्लिनिक ने 25 मार्च को एक बयान जारी कर चेतावनी दी थी कि मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्वीन, साथ ही एचआईवी के इलाज में काम आने वाली दवा लोपिनाविर और रिटोनाविर से हृदय रोगों का ख़तरा है और मरीज़ को अचानक दिल का दौरा भी पड़ सकता है.
मेयो क्लिनिक का कहना है,"हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन जैसी दवाएं कोशिका के स्तर पर एक ख़ास पोटेशियम चैनल को ब्लॉक कर सकता है जो मनुष्य के दिल के इलेक्ट्रिकल रिचार्ज सिस्टम को कंट्रोल करता है. इस प्रक्रिया में किसी भी तरह का खलल पड़ने से दिल के धड़कनें असामान्य हो सकती हैं और मरीज़ को अचानक दौरा पड़ सकता है." मेयो क्लिनिक ने सिफारिश की है कि जिन मरीज़ों को ये दवाएं दी जा रही हैं, उनका नियमित रूप से इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) कराया जाए. छह अप्रैल को जारी हुई 'पाहो' की रिपोर्ट में भी दिल के मरीज़ों में दूसरी बीमारी के इलाज के दौरान हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल के असर का जिक्र किया गया है.
फ्रांस के नीस में स्थित सेंटर हॉस्पिटल यूनिवर्सिटी के कार्डियोलॉजिस्ट एमिल फेरारी ने नीस-मैटिन अख़बार को सात अप्रैल को बताया था,"हमें कोरोना वायरस से संक्रमित एक मरीज़ पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एज़िथ्रोमाइसीन (एक कंपाउंड जो अक्सर साथ में दिया जाता है) का टेस्ट रोक देना पड़ा था. दोनों दवाएं देने के बाद इस मरीज़ के दिल में कुछ समस्या आ गई थी." भारत में कोरोनावायरस के मामलेयह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.राज्य या केंद्र