लॉकडाउन में अस्पताल से भगाया, तो महिला ने सड़क पर ही दे दिया बच्ची को जन्म...

कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाने के लिए जहां डॉक्टर अपनी जान जोखिम में डालकर दिन रात कर्तव्य का पालन कर रहे हैैं। वहीं दूसरी और एक महिला डॉक्टर की वजह से गर्भवती महिला को सड़क पर बेटी को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा। प्रसूता का आरोप है डॉक्टर ने अस्पताल में भर्ती नहीं किया, उन्हें भगा दिया। गांव जा रहे थे तो बॉर्डर से निकलने नहीं दिया। ऐसे में पुलिस मददगार बनकर आई। प्रसूता को अस्पताल पहुंचाया। 
शिवपुरी जिले के ग्राम चनखारी का रहने वाला विनोद जाटव करीब डेढ़ महीने पहले पत्नी भागवती, दो बेटी और एक बेटे के साथ पारसेन बिजौली में बीरेन्द्र शर्मा के यहां फसल काटने आए थे। भागवती गर्भवती थी। 15 दिन पहले पत्नी को पीढ़ा हुई तो उसे मुरार के प्रसूति गृह लेकर पहुंचा। लेकिन डॉक्टर ने यह कहकर टरका दिया कि अभी डिलीवरी का समय पूरा नहीं हुआ है। पत्पी को लेकर वह पारसेन लौट आया। 3 दिन पहले गुरुवार को फिर भागवती को प्रसव पीड़ा हुई। विनोद फिर उसे मुरार प्रसूति गृह लेकर आया। डॉक्टर को बताया तो कई सवाल पूछ डाले लेकिन भर्ती नहीं किया। 

रातभर अस्पताल के बाहर काटी। शुक्रवार सुबह पारसेन आ गई। पीड़ा ज्यादा थी इसलिए विनोद ने बीरेन्द्र से गांव छोडऩे के लिए कहा। बीरेन्द्र शनिवार को उसे गांव छोडऩे जा रहा था, लेकिन भितरवार के आगे शिवपुरी जिले के सीहोर बॉर्डर पर उसे निकलने नहीं दिया। वहां से वापस लौटी तो भितरवार के केरूआ गांव के पास दोपहर को भागवती ने बच्ची को जन्म दिया। पुलिस को पता चला तो एफआरवी 12 मौके पर पहुंची। एंबुलेंस बुलाकर प्रसूता को भितरवार के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि जच्चा और बच्चा दोनों ही स्वस्थ है। विनोद और भागवती के पहले से दो बेटी और एक बेटा है।