कोरोना के समय हुई मौत तो डर के मारे गांववाले लाश छोड़कर भागे, घंटों बिलखती रही उसकी पत्नी...

पठानकोट में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई। गांव पहाड़ोचक्क में हर्निया के मरीज बुजुर्ग की मौत हो गई। इसके बाद ग्रामीण शव को बीच चौराहे में छोड़कर भाग गए। कोरोना के डर से तीन घंटे तक जब गांव का कोई भी व्यक्ति बाहर नहीं आया तो स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारियों और महिला सरपंच ने शव को श्मशान घाट पहुंचाया और बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया। जानकारी के अनुसार पहाड़ोचक्क के बुजुर्ग आंचल पाल को हर्निया थी। तीन दिन से दीनानगर के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 
अस्पताल प्रबंधन ने बुजुर्ग की बिगड़ती हालत को देख पठानकोट सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। बुजुर्ग की पत्नी उसे घर ले आई। गुरुवार को पति की हालत बिगड़ी तो उसने 108 पर कॉल कर एंबुलेंस बुलाई। एंबुलेंस पर चढ़ने के दौरान ही आंचल पाल की मौत हो गई। एंबुलेंस तक पहुंचाने आए गांव के लोगों ने जैसे ही बुजुर्ग को गिरते देखा तो सब शव को चौराहे पर छोड़कर इधर-उधर हो गए। 

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि दंपति के अलावा परिवार में कोई नहीं है। तीन घंटे तक लाश चौराहे में पड़ी रही और मृतक की पत्नी विलाप करती रही। जानकारी मिलने पर सरपंच राधा रानी, सीएचसी घरोटा से फार्मेसी अफसर अमरीक, एएनएम मनदीप कौर, आशा फेसिलिटेटर सुनीता देवी और दर्जा चार कर्मचारी संजीत सिंह मौके पर पहुंचे। सरपंच ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ शव को चारपाई समेत श्मशान घाट पहुंचाया। 

सरपंच ने बताया कि गांव के लोगों का कहना था कि बुजुर्ग के टेस्ट करवाओ, रिपोर्ट निगेटिव आई तो ही संस्कार में साथ देंगे। सरपंच राधा रानी ने बताया कि लोगों की संवेदनहीनता के बाद उन्हें प्रशासन से भी निराशा मिली। उन्होंने कई अफसरों को फोन लगाया लेकिन सभी किसी और अधिकारी का नंबर देकर उनसे बात करने को कह देते। कई फोन करने के बाद उन्होंने सीएचसी घरोटा की एसएमओ बिंदु गुप्ता को फोन किया तो उन्होंने टीम को भेजा। इसके अलावा एसएचओ तारागढ़ सुरिंदर पाल ने भी सहयोग देकर अंतिम संस्कार में मदद की।