लॉकडाउन में जावेद अगर अस्पताल से नहीं भागता, तो कइयों को कोरोना ही नहीं होता

मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में 2017 बैच के एक युवा आईपीएस अधिकारी कोरोना वायरस संक्रमित पाए गए हैं. ये अधिकारी उन पुलिस कर्मियों में शामिल थे जो 20 अप्रैल को नरसिंहपुर जिले से सटे जबलपुर में एक कोरोना वायरस संक्रमित और रासुका (NSA) के तहत गिरफ्तार जावेद खान को पकड़ने गए थे. जावेद पुलिस कर्मियों को चकमा देकर अस्पताल से भाग गया था.
जबलपुर के कलेक्टर भरत यादव ने कहा कि बतौर सीएसपी तैनात यह युवा अधिकारी उस टीम में शामिल थे जो इंदौर से रासुका के तहत गिरफ्तार जावेद खान को दुबारा पकड़ने गई थी. जावेद 19 अप्रैल को जबलपुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल से भाग गया था. रिपोर्ट सामने आने के बाद जो अधिकारी सीएसपी के संपर्क में आए थे वे क्वारेंटाइन में चले गए हैं. 
गत 19 अप्रैल को अस्पताल से भागने के बाद जावेद खान जबलपुर के बाहरी इलाके से एक ट्रक से लिफ्ट लेकर नरसिंहपुर पहुंचा. वहां से उसने मोटरसाइकिल पर इंदौर भागने की कोशिश की लेकिन वहां की पुलिस ने उसकी योजना को नाकाम कर दिया और एक चेक पोस्ट पर उसे गिरफ्तार कर लिया.
जावेद खान को तीन अन्य लोगों के साथ सात अप्रैल को इंदौर में एक कांस्टेबल पर हमला करने के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था. जावेद और एक अन्य आरोपी को जबलपुर की जेल में भेजा गया था, जबकि दो अन्य को सतना. चार में से तीन आरोपी कोरोना से संक्रमित पाए गए थे. 
इसके बाद 11 अप्रैल को उसे इलाज के लिए जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था. हालांकि टीम में गए एक उप-निरीक्षक और एक एडीशनल एसपी (एएसपी) की रिपोर्ट निगेटिव आई है. जबलपुर में कोरोना से संक्रमित 43 मरीज़ हैं जिसमें से एक की मौत हो चुकी है.