लॉकडाउन में बेटी की आंखों में आंसू देख शर्म छोड़ पिता चलाने लग गया ठेला

लॉकडाउन के दौरान कानपुर शहर में लाखों लोगों के पास इस समय कोई काम नहीं है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हुआ तो अब तमाम लोग सब्जी और फल के ठेले लगाने लगे। इन्हीं में से एक हैं पी रोड निवासी अभिषेक। बेटी की आंखों में आंसू देख शर्म छोड़कर ठेला चलाना शुरू कर दिया। सीसामऊ बाजार वाली रोड पर ठेला लेकर आ रहे एक युवक पर निगाह पड़ी। 
देखने से ही लग रहा था कि पहली बार इस शख्स ने ठेला लगाया है। पूछने पर बात सही निकली। यह थे अभिषेक जो लॉक डाउन के पहले साड़ी के शोरूम में काम किया करते थे। वहां अपनी मीठी भाषा से एक दिन में 100 साड़ियां बेच डालते थे। पिछले एक महीने से घर पर बैठे हैं। पूछने पर इनकी आंख भर आई। बोले -‘क्या करूं घर में बैठा था। मेरी बेटी बहुत छोटी है। उसे क्या पता कि लॉकडाउन क्या होता है। उसकी इच्छाओं को रोक नहीं पाया। उसने कुछ मांगा तो रोना आ गया। अब किराए का ठेला चला रहा हूं। रोजाना साढ़े तीन सौ रुपए कमा लेता हूं।

थोड़ दूर बढ़ने पर रामबाग में दीपक मिश्रा मिल गए। बताया कि डीएवी कॉलेज से ग्रेजुएट हैं। बिरहाना रोड की एक फर्म में काम करते थे। लॉकडाउन में फर्म बंद हो गई। कोई काम नहीं है। कुछ दिन तो जैसे-तैसे काम चला, अब मजबूरी में ठेला लगा लिया। इसी तरह मोती झील में बागीश श्रीवास्तव फल बेचने निकले थे। पुलिस ने रोक लिया। बाइक पर ही पीछे फल रखा हुआ था। पूछने पर बताया कि होम डिलीवरी में फल बेचने जा रहा। कुछ काम न होने से यह काम बेहतर है। कम से कम खर्च तो चलेगा।