लॉकडाउन : कोरोना का खौफ, करीब आकर भी अपनों से दूर!

कोरोना का खौफ, करीब आकर भी अपनों से दूर
देश में लॉकडाउन होने पर मुसीबतें झेलते हुए घर तक आए परदेसी अपनों से दूर हैं। खुद के साथ ही अपनों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में ठहरे लोगों में कोई फर्श पर सो रहा है तो किसी के लिए टेलीविजन देखने की भी व्यवस्था की गई है। हालांकि अधिकतर लोग अपने घर से आया भोजन कर रहे हैं। भोजन लेकर आने वाले परिजन भी दूर से बात कर रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालय रामापुर में मंगलवार दोपहर 12.10 बजे बाहर से आए चार लोग मौजूद थे। दिल्ली से आए शमशाद को सोमवार रात मुश्किल से यहां लाया गया। उसे विद्यालय में फर्श पर सोना पड़ा। मंगलवार को दिल्ली से ही गोविंद, धर्मेंद्र व रामसरन पहुंचे तो ग्राम प्रधान ने चारपाई भेजी लेकिन बिस्तर नहीं था। सभी अजनबी से चारपाई पर दूर-दूर बैठे रहे। गांव के लोगों ने दूरी बनाए रखी और घर से खाना लेकर आने पर बात की। दोपहर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी का चेकअप किया।

जेठवारा इलाके का पूर्व माध्यमिक विद्यालय सराय नाहर राय। दिल्ली, मुंबई, गुजरात, विलासपुर से आए 12 लोग चारपाई पर दूर-दूर बैठे थे। ग्राम प्रधान ने बाहर से आने वालों के लिए विद्यालय में टीवी लगवाई लेकिन सभी दूर-दूर अलग चारपाई पर बैठे हुए अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहे। उनमें अधिकतर लोग तीन दिन से ठहरे हैं। सूचना देने के बाद भी चेकअप के लिए मेडिकल टीम नहीं आई है। परदेस से आने पर जिन परिजनों से मिलने के लिए बेकरारी होती थी अब वे दूर से खडे़ होकर बात कर रहे हैं। विद्यालय में मौजूद लोगों का कहना था कि वे मुश्किल उठाकर परदेस से भागकर न आए होते तो ठीक था।

चार दिन पहले छह लोगों के पैर अपनों के करीब आकर गांव के बाहर ठिठक गए। ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने सभी को प्राथमिक स्कूल बड़नपुर में ठहरने कहा तो सभी अपनों की सलामती के लिए तैयार हो गए। ग्राम प्रधान अशोक कुमार सिंह ने सभी को अस्पताल भेजकर चेकअप कराया। इसके बाद प्रधान की ओर से भोजन भी मिल रहा है। गांव के लोगों ने दूरी बनाई है लेकिन परिजन प्रतिदिन आकर दूर से बातचीत कर रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय नरी में मुंबई से आए आठ लोगों ने कोरोना के खौफ से बसेरा लिया है। मंगलवार अपराह्न करीब दो बजे सभी लोग फर्श पर चटाई बिछाकर दूर-दूर बैठे रहे। सभी मुंबई से अंतू तक की अपनी यात्रा की कठिनाई पर बात कर रहे थे। हालांकि उनसे गांव के लोगों का कोई संपर्क नहीं हो रहा है। परिजन भोजन देने के साथ हालचाल पूछकर घर चले जा रहे हैं।