खेत में सडऩे लग गईं हरी सब्जियां, नहीं मिल रहा है कोई भी खरीदार!

कम जमीन में सब्जी लगाकर अपनी आजीविका चलाने वाले छोटे किसान इन दिनों संकट में हैं। लॉकडाउन के पहले उन्होंने खेतों में सब्जी लगा दो दी थी, लेकिन अब पकने के बाद कोई खरीदार नहीं मिल पा रहा हैं। वह भी बाजार जाकर इसे बेच नहीं पा रहे हैं। ऐसे में सब्जी खेत में ही अब सडऩे की कगार पर हैं। ऐसे हाल जिले भर में बनने लगे हैं। ये ताजा मामला जिले के कर्री गांव का हैं। जहां के सब्जी किसान इन दिनों बहुत परेशान हैं। वह रोज खेत में पहुंचते हैं। सब्जी के हाल देखते हैं और वापस चले आते हैं। 
सब्जी पूरी तरह पक चुकी हैं, अब जल्द नहींं तोड़कर बेची गई तो खेत में ही सड़ जाएगी। इसकी चिंता किसानों को हैं। किसानों को इस समय खरीदार आड़तियां भी नहीं मिल रहे हैं। जबकि मंडी और बाजार भी पूरी तरह लॉकडाउन में बंद हैं। कर्री के किसान मत्थर कुशवाहा, हिम्मू कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में गोभी, टमाटर लगाए हुए हैं। गोभी पूरी तक पक चुका हैं। अब दो दिन में नहीं तोड़ा तो खराब होने लगेगा। कीड़े लग गए तो पूरी फसल खराब हो जाएगी। इधर टमाटर पककर पककर लाल हो गया हैं तो अब पौध से झड़कर गिरने लगा हैं। 

वह इन सब्जियों को फिलहाल तोड़ भी नहीं सकते, क्योंकि कोई खरीदार नहीं है। तोडऩे की वजह से और जल्द सब्जी खराब हो जाएगी। कर्री गांव की तरह की जिले भर के सैकड़ों गांव में इन दिनों यही स्थिति बनी हुई हैं। राजनगर और खजुराहो क्षेत्र में लगातार कफ्र्यू होने के अलावा जिले भर में लॉकडाउन ने इन छोटे सब्जी किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया हैं। उनकी लागत भी अब सब्जी से नहीं निकल पा रही हैं। 

ऐसी स्थिति में सब्जी को किसान खेत में लगा रहने दे रहे हैं। जो सड़ रही हैं। इससे किसान परेशान हैं। किसान बताते हैं कि उनकी सब्जी खेत से निकलते ही बाजार में बिक जाया करती थी, जिससे उनका रोजमर्रा का काम चलता था। उन्होंने लॉकडाउन को नोटबंदी से भी खराब स्थिति में बताया। जिससे भरण पोषण और अगली फसल का भी संकट आन खड़ा हुआ हैं। कुछ किसान बीज, मशीनरी, दवा के लिए कर्ज भी लिए हुए थे, जो भी अब अदा करने में असमर्थता जता रहे हैं।