"तुम शक्ल से डॉक्टर नहीं लगते" और फिर कोरोना वार्ड में ड्यूटी से लौट रहे डॉक्टर के साथ पुलिस ने किया ऐसा....

राजस्थान के भरतपुर में एक डॉक्टर को पुलिस ने पीट दिया. घटना 11 अप्रैल की है. गुस्साए डॉक्टरों ने हंगामा किया. आऱोपी पुलिसकर्मी और धमकाने के आरोपी एसडीएम पर एफआईआर की मांग की. साथ ही उन्होंने काम रोकने की धमकी दी. इसके बाद कलेक्टर ने डॉक्टरों से बात की. उन्हें समझाया. फिर जाकर डॉक्टर माने. ये सब हुआ चिकित्सा राज्यमंत्री के क्षेत्र में. राजस्थान सरकार में चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग भरतपुर से ही विधायक हैं.
इंडिया टुडे से जुड़े सुरेश फौजदार ने बताया कि जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर सत्येंद्र डागुर भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल यानी आरबीएम अस्पताल में तैनात हैं. 11 अप्रैल को सुबह साढ़े 10 बजे के करीब वे अस्पताल से घर जा रहे थे. इसी दौरान रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोका. आरोप है कि इसके बाद एक पुलिसवाले ने पीछे से उनकी गर्दन पर थप्पड़ मार दिया. डॉक्टर ने इस पर नाराजगी जाहिर की. लेकिन पुलिस वालों ने उनकी एक न सुनी.

डॉ. सत्येंद्र ने कहा- "मैंने पुलिसवालों को बताया कि मैं कोरोना वार्ड से नाइट ड्यूटी कर आ रहा हूं. इस पर पुलिसवालों ने कहा कि तुम खाने का सामान ले जा रहे हो. तुम डॉक्टर नहीं हो. मैंने आईकार्ड दिखाने की कोशिश की. उन्होंने बोला कि तुम शक्ल से डॉक्टर नहीं लगते. इसके बाद पीछे से एक पुलिसकर्मी ने थप्पड़ मार दिया." डॉ. सत्येंद्र ने आरोप लगाया कि मौके पर आए एसडीएम (सिटी) संजय गोयल ने भी उन्हें डांटा. वे बात सुनने को तैयार ही नहीं थे. जब वह शिकायत कर रहे थे तो एसडीएम उन्हें ही चुप करा रहे थे. एसडीएम का डॉक्टर से बातचीत का वीडियो भी सामने आया है. इसमें डॉ. सत्येंद्र रोते नज़र आ रहे हैं. और एसडीएम उन्हें बोलने से रोकते दिख रहे हैं.
वहीं पुलिस का आरोप है कि डॉ. सत्येंद्र के पास न तो हेलमेट था. और न गाड़ी के कागज. उनका आईकार्ड भी उनके गले में नहीं था. पिटाई की घटना के बाद बाकी डॉक्टर मौके पर पहुंच गए. डॉक्टर ने अस्पताल के अधिकारियों को पुलिस की पिटाई के बारे में बताया. डॉक्टरों ने आरोपी पुलिसकर्मी और एसडीएम संजय गोयल पर एफआईआर की मांग की. साथ ही उन्होंने काम रोकने की चेतावनी भी दी. इसके बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे. उन्होंने अस्पताल प्रशासन और डॉ. सत्येंद्र से बात की. डॉक्टरों से एडीएम राजेश गोयल ने घटना के लिए माफी मांगी.

इस मामले के बारे में जिला कलेक्टर नथमल डिडेल ने कहा कि घटना गलतफहमी की वजह से हुई. घटना के वक्त डॉ. सत्येंद्र ने न तो डॉक्टरों वाला एप्रिन पहना था और न उनके पास स्टेथोस्कोप था. उनके गले में आईकार्ड भी नहीं था. आईकार्ड गले में होने पर पुलिस को पहचानने में आसानी होती. लेकिन पुलिस अधिकारियों और एडीएम ने घटना के लिए माफी मांगी. रात में काम का बहिष्कार करने के ऐलान का पता चला. इसके बाद मैं और एसपी हैदर अली मेडिकल हॉस्टल गए. वहां हमने फिर से माफी मांगी.