लॉकडाउन का जायजा लेने जा रहे थे एसपी सड़क पर दिखीं महिलाएं और फिर जो हुआ...

लॉकडाउन धीरे धीरे अपनी 21 दिन की निर्धारित यात्रा पर आगे बढ़ रहा है. 9 दिन हो चुके हैं. इस बीच शासन प्रशासन पूरी शिद्दत से लॉकडाउन को सफल बनाने में लगा हुआ है. जनता भी बखूबी इसका पालन करती दिखाई पड़ रही है. पुलिस प्रशासन लोगों की हर सम्भव मदद के लिए तत्पर है. लॉकडाउन का सबसे ज़्यादा असर मजदूरों गरीबों पर पड़ा है. असंख्य दिहाड़ी कामगार गरीब अपने गांव घर लौटने की जद्दोजहद में हैं. इनके सामने जो सबसे बड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है वो है भूख की. 
कई कई किलोमीटर पैदल ही सफर तय किया जा रहा है. इस दौरान समाज के लोगों से लेकर सिस्टम के जिम्मेदारों द्वारा इनकी मदद की जा रही है. अधिकारी भी पूरी शिद्दत से लगे हैं जरूरतमंदों की हर सम्भव सहायता को लेकर. लॉकडाउन के समय सिस्टम के जिम्मेदारों द्वारा पूरी संजीदगी दिखाई जा रही है कि कोई भी भूखा न रहने पाए. शासन प्रशासन हर स्तर पर जरूरतमंदों की मदद के लिए जी जान से जुटा है. कर्मचारी से लेकर अधिकारी सभी इस कार्य में शिद्दत से लगे हैं. 

बतौर उदाहरण चित्रकूट एसपी अंकित मित्तल की नज़र भूख प्यास से बेहाल महिलाओं पर पड़ी तो उन्होंने फौरन अपनी गाड़ी रुकवाकर उन महिलाओं से आने जाने की जानकारी ली. उसके बाद सेनेटाइजर से उनका हांथ साफ करवाकर उन्हें भोजन दिलवाया. महिलाओं ने एसपी को बताया कि उनके पास राशन व राशनकार्ड नहीं है. जिसपर एसपी अंकित मित्तल ने डीएम शेषमणि पांडेय से वार्ता कर उन्हें इसकी जानकारी दी. जिसपर सम्बंधित महिलाओं को कोटेदार के पास भेज उन्हें राशन दिलवाया गया. एसपी ने जनपद के बीहड़ों में बसे इलाकों का जायजा लिया.

हर स्तर पर निगहबानी

लॉकडाउन के पालन से लेकर बाहर से आने वालों तक पर पुलिस प्रशासन की पैनी निगाह देखी जा रही है. चूंकि चित्रकूट दो राज्यों(यूपी-एमपी) के मध्य स्थित है सो मध्य प्रदेश जाने वाले कई मजदूर जनपद की सीमा से होकर गुजर रहे हैं. ऐसे सभी लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करने का सख्त निर्देश डीएम ने दिया है. वहीं सीमाई इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है कोई बाहर से आकर अपनी सूचना छिपा तो नहीं रहा.
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