"साहब, भरपेट खाना तक नहीं मिलता" लॉकडाउन में दुखड़ा सुनाते हुए रो पड़ा ऑटो ड्राइवर

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन लगाया गया। लेकिन इस लॉकडाउन से गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और कामगारों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। लॉकडाउन में कोई काम ना होने से ना इनके पास पैसे हैं और ना ही खाने को है। ये लोग पूरी तरह से सरकार की ओर से मिलने वाली मदद पर निर्भर हैं। 
दिल्ली के ऐसे ही ऑटो ड्राइवर हैं यूनुस अंसारी। इनके पास खाने तक के लिए पैसे नहीं हैं। अपना दुख बताते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं। उन्होंने बताया, 'मुझे अपना पेट भरने के लिए भरपेट खाना नहीं मिलता। मैं बिना पैसे के भिखारी की तरह महसूस करता हूं। हम बाहर जाते हैं तो पुलिस हमें मारती है। मुझे पास के एक स्कूल से खाना मिलता है। मेरा परिवार है, लेकिन उन्हें भोजन उपलब्ध कराने के लिए भी पैसे नहीं हैं।' 
यही हाल कैब ड्राइवरों का है। तेलंगाना के हैदराबाद में ऐप-आधारित कैब ड्राइवरों का कहना है, 'पिछले 1 महीने से कोई काम नहीं है। हमारे वित्तीय खर्चों का प्रबंधन करना बहुत मुश्किल हो गया है। हमारे बच्चे भी परेशान हो रहे हैं। हम राज्य और केंद्र सरकार से हमारी मदद करने का अनुरोध करते हैं।'