कोरोना : जो दवा मांग रहे हैं राष्ट्रपति ट्रंप, जानें उसको खाना है कितना खतरनाक?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से मलेरियारोधी दवा ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ की मांग की है। इसके बाद पूरी दुनिया में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या मलेरियारोधी दवा से कोरोना का वायरस मर सकता है? हालांकि दवा का खुद से प्रयोग सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
भारत सरकार ने तय कर दिया है कि ये दवा मरीजों के इलाज में लगे स्वास्थ्यकर्मियों और संक्रमित मरीज के संपर्क में रहने वाले लोगों को दी जाएगी। सरकार ने ये पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि दवा के असर के कम साक्ष्य मौजूद हैं और इस आधार पर दवा का प्रयोग सिर्फ स्वास्थ्यकर्मी ही कर सकते हैं। इस बीच हालांकि भारतीय फार्मा उद्योग ने कहा है कि दवा का पर्याप्त स्टॉक है।

क्या है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का ब्रांड नाम प्लक्वेनिल है जिसका प्रयोग मलेरिया के इलाज में होता है। इसके अलावा इसका प्रयोग रिमोटाइड आर्थराइटिस और गर्भावस्था के दौरान जोड़ों में होने वाले दर्द के लिए डॉक्टर लिखते हैं। दवा को अमेरिका ने वर्ष 1955 में प्रयोग की अनुमति दी थी। 128वीं दवा जो अमेरिका में सबसे अधिक लिखी गई। डब्ल्यूएचओ ने जरूरी दवाओं की सूची में रखा है। 2017 में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन अमेरिकी डॉक्टरों द्वारा सबसे अधिक लिखी जाने वाली दवा थी जिसका प्रयोग करीब 50 लाख लोगों ने किया।

दवा खाने के बाद ऐसी तकलीफ
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा खाने के बाद कई तरह की तकलीफ भी हो सकती है। इसमें नाक बहना, पेट में दर्द और बार-बार शौच के लिए जाना प्रमुख है। दवा खाने के बाद पेट में असहनीय दर्द, डायरिया, हृदय संबंधी तकलीफ के साथ संभव हो कि पाचनतंत्र खराब हो जाएगा, सिर में दर्द रहेगा और नाक बहने के साथ उल्टी की तकलीफ शुरू हो जाएगी।

दवा को लेकर है ऐसा संदेह 
मलेरियारोधी दवा से कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज पर गतिरोध की स्थिति है। अमेरिकी संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शियस डिजीज के निदेशक डॉ. एंथनी फॉसी ने इस दवा से कोरोना मरीजों के इलाज का विरोध किया है। उन्होंने दवा की गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए कहा कि ये कितनी कारगर होगी इसका कोई साक्ष्य नहीं है। इसी तरह सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने कहा है कि अभी ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला है जिसके आधार पर कहा जाए कि मलेरिया की दवा से कोरोना का इलाज संभव है।