लॉकडाउन में मुंबई से पैदल अपने पहुंचा घर, लेकिन मां ने कोरोना के खौफ में नहीं खोला दरवाजा तो फिर जानिए क्या हुआ....

पूरे देश में लॉकडाउन के चलते लोग घरों में कैद हैं। शहरों में कमाने की आस लेकर गए लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। ऐसे में कुछ लोग किसी तरह का इंतजाम करके अपने घरों को लौट आए हैं, लेकिन यहां पहुंचने पर भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। कोरोना वायरस के फैलने के डर से लोग अपनों को भी घरों में घुसने से रोक रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला रविवार को बनारस में देखने को मिला।
एक युवक अपने पांच दोस्‍तों के साथ मुंबई से 1600 किलोमीटर की दूरी तय कर घर पहुंचा तो परिजनों ने कोरोना के डर से मुंह फेर लिया। अस्‍पताल में प्रारंभिक जांच के बाद छोड़ दिए जाने से अब युवक गली-गली भटक रहा है। अंदेशा है कि उसकी वजह से खतरा बढ़ न जाए। हालांकि देर शाम जानकारी मिलने पर पुलिस ने युवक को उसके घर में प्रवेश कराया। युवक को घर के एक कमरे में अकेले रखा गया है।
वाराणसी में पूर्वांचल की सबसे बड़ी किराना मंडी गोला दीनानाथ इलाके में रहने वाला अशोक (25) चार महीने पहले मुंबई कमाने गया था। सेंट्रल मुंबई के नागपाड़ा के एक होटल में वह काम करता था। लॉकडाउन के कारण होटल बंद हो गया। कई दिनों से खाने को कुछ न मिलने और पास में पैसा न होने से उसे परिवार में ही ठौर मिलने की उम्मीद जगी। बनारस आने के लिए आशोक को कोई साधन नहीं मिला तो पैदल ही निकलने की ठान ली। साथ में काम करने वाले पड़ोसी चंदौली जिले के पांच दोस्‍त भी उसके साथ हो लिए। भूखे-प्‍यासे लगातार छह दिन तक चलने के बाद सभी रविवार सुबह बनारस पहुंचे।
अशोक ने बताया कि रामनगर और मुगलसराय में रहने वाले दोस्‍त अपने घरों को चले गए। अशोक ने फोन कर परिजनों को बनारस पहुंचने की सूचना दी। कुछ देर बाद जब घर पहुंचा तो मुंबई से कोरोना वायरस लेकर आने की आशंका से मां-भाई ने दरवाजा खोलने से साफ मना कर दिया। थका हारा अशोक काफी देर तक दरवाजे पर बैठा रहा। मोहल्ले के लोगों की सलाह पर पास के ही मंडलीय अस्‍पताल कबीरचौरा पहुंचा पर वहां उसकी जांच नहीं हुई। बाद में इलाके के एक व्‍यक्ति ने रिस्‍क लेकर अपनी कार से उसे कोरोना लेवल-टू दीनदायाल अस्‍पताल पहुंचाया।