"भागो मत, इससे लड़ो और जीतो", कोरोना को मात देने वाली मारीशा ने बताया!

मुरादाबाद जिले की पहली कोरोना पाजिटिव मारीशा ने आखिरकार कोरोना को मात दे दी। मारीशा की रविवार को दूसरी सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आ गई है। मारीशा ने कहा कि जीने की दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी बीमारी से लड़ा जा सकता है। उसने भी जानवेला कोरोना से हिम्मत नहीं हारी। कोरोना को भूलाकर किताबों और इंटरनेट से दोस्ती कर ली। कोरोना को दिमाग में हावी नहीं होने दिया। अस्पताल के स्टाफ और उसकी मां ऋचा शुक्ला ने उसका हौसला बढ़ाया। अस्पताल के स्टाफ ने पूरा स्नेह दिया और घर की कमी महसूस नहीं होने दी। कहा कि भागे नहीं। 
19 साल की मारीशा शुक्ला फ्रांस में अगस्त 2019 से पढ़ाई कर रही है। मारीशा मूंढापांडे में रहती है और प्रदेश के मंत्री चेतन चौहान की रिश्तेदार हैं। 15 मार्च को फ्रांस से वह भारत लौटी और 17 मार्च को मूंढापांडे पहुंचने पर बुखार और खांसी की शिकायत हुई। फारेन ट्रैवल हिस्ट्री होने के कारण चिकित्सकों ने उसका सैंपल जांच के लिए भेजा और रिपोर्ट पाजिटिव आ गई। मारीशा जिले की पहली कोरोना पाजिटिव थी। 

भर्ती होने के बाद 29 मार्च को उसका पहला सैंपल भेजा गया। 31 मार्च को सैंपल रिपोर्ट पाजिटिव आ गई। तीन अप्रैल को दूसरा सैंपल भेजा गया और रविवार को रिपोर्ट निगेटिव आ गई। रिपोर्ट निगेटिव आने पर मारीशा की मां ऋचा शुक्ला और मामा अनुज चौहान ने फोन कर बधाई दी। नोडल अधिकारी डा. डीके प्रेमी और जिला अस्पताल के स्टाफ ने भी मारीशा को शुभकामनाएं दी। मारीशा ने फोन पर बताया कि उसने हिम्मत नहीं हारी। शुरुआत में अस्पताल के एकांत कमरे ने परेशान जरूर किया। 

मां की याद आती थी। चिकित्सक और स्टाफ के कर्मियों के आने से हौसला बढ़ता था। लेकिन वो भी हमेशा साथ नहीं रह सकते थे। खुद को यहीं व्यस्त किया तो अस्पताल में 17 दिन कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला। उसने बताया कि जीने की दृढ़ इच्छा और परिवार के हौसले से किसी भी बीमारी से लड़ा जा सकता है। कोरोना से भी उसने ऐसे ही लड़ा और जीत हासिल की। मारीशा ने अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ का आभार जताया। कहा कि स्टाफ में बहुत अच्छा व्यवहार किया।  

मारीशा ने कहा कि वह भले ही एक बंद कमरे में थी, लेकिन उसने खुद को दुनियाभर की घटनाओं से अपडेट रखा। खासकर, कोरोना पर उसकी पूरी नजर रही। मारीशा ने कहा कि कोरोना जानलेवा है। जिनमें इसके लक्षण हैं उन्हें सामने आना चाहिए। इससे भागने की जरूरत नहीं है। मारीशा के ठीक होने पर उसका परिवार और अस्पताल स्टाफ ही नहीं बल्कि पूरा गांव खुश है। नरेंद्र मोदी के रात नौ बजे दीपक जलाने के आह्वान पर ग्रामीणों ने मारीशा के ठीक होने पर दीपक जलाकर खुशी इजहार की।