ड्रोन से बनाए वीडियो तो उठा मरकज के अंदर के हालात से पर्दा, सामने आईं चौंकाने वाली कुछ गतिविधियां

निजामुद्दीन थाना पुलिस चतुराई नहीं दिखाती तो शायद तब्लीगी जमात के मरकज के भीतर चल रही कोरोना को न्यौता देने वाली गतिविधियां सामने नहीं आ पातीं। मरकज के अंदर पुलिस को जाने नहीं दिया जा रहा था। ऐसे में निजामुद्दीन थाने की पुलिस ने 26 मार्च को ड्रोन के जरिए मरकज की अंदर का वीडियो बनाया। इस वीडियो से महामारी को रोकने के लिए उठाए गए सरकारी कदमों की अवहेलना वाली गतिविधियां साफ सामने आ गईं। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की तफ्तीश में यह बात सामने आई है।
दक्षिण-पूर्व जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 21 मार्च से ही मरकज के मौलानाओं से कोरोना रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी मांगी जा रही थी। 24 मार्च को निजामुद्दीन थानाध्यक्ष मुकेश वालिया की तरफ से नोटिस दिया गया था। डब्ल्यूएचओ की टीम 25 मार्च को मरकज आई और वहां मौजूद लोगों से सामाजिक दूरी बनाने के लिए कहा था। मरकज संचालकों ने इसकी अनदेखी कर दी। 

अगले दिन ड्रोन से वीडियो बनाया गया। इससे पता लग रहा है कि जमाती एक-दूसरे से सटकर बैठे हुए थे। 29 मार्च को यहां प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने आना शुरू कर दिया था। इसके बाद लोगों को निकालना शुरू किया गया। 28 मार्च को एसीपी लाजपत नगर की तरफ से जो नोटिस दिया गया था, उसमें स्पष्ट कहा गया था कि किसी जमाती की तबीयत खराब हो, खांसी या जुकाम हो तो उसके बारे में तुरंत स्वास्थ्य विभाग को बताया जाए, मगर मरकज प्रशासन ने इस दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया। अपराध शाखा ने निजामुद्दीन थानाध्यक्ष व एसीपी लाजपत नगर द्वारा भेजे गए नोटिसों की कॉपी ले ली है।

अपराध शाखा के पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मरकज के पदाधिकारियों ने महामारी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों को गंभीरता से नहीं लिया। 30 मार्च को आरएमएल में तमिलनाडु के एक जमाती की कोरोना से मौत के बाद उनमें अफरा-तफरी मच गई। इस व्यक्ति को 28 मार्च को ही अस्पताल भेजा गया था। इसके बाद मौलानाओं ने मरकज से जाना शुरू कर दिया था।