कोरोना से निपटने में तुर्की का "लॉकडाउन मॉडल" दुनिया में है सबसे अलग, "बंद है भी और नहीं भी"

तुर्की में सरकार ने वीकेंड में 48 घंटे का कर्फ्यू लगाया था. कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दुनिया के तमाम देशों में लॉकडाउन घोषित किया जा चुका है. कहीं पर लॉकडाउन के लेकर बेहद सख्त तो कहीं थोड़ी नरमी वाले नियम भी हैं. लेकिन तुर्की ने लॉकडाउन को लेकर सबसे अलग ही नियम बनाए हैं. कोरोनावायरस से निपटने में अलग राह पर चलते हुए तुर्की ने वीकेंड पर लॉकडाउन लगाया जबकि सप्ताह भर स्टे-होम के तहत केवल बच्चों और बुजुर्गों के घर से बाहर निकलने पर रोक लगी रही. ऐसे में वीकेंड पर लॉकडाउन और आयु-विशेष प्रतिबंधों के जरिए तुर्की ने कोरोना से लड़ाई में नया प्रयोग किया.
CNN में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की में पिछला वीकेंड लॉकडाउन रहा. 31 प्रांतों में 48 घंटे का कर्फ्यू लगाया गया. तुर्की सरकार ने दो घंटे की पूर्व सूचना पर कर्फ्यू का ऐलान कर दिया था जिस वजह से तुर्की में हड़कंप मच गया. जरूरी सामान खरीदने के लिए दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. कुछ जगहों पर लोगों ने थोड़ा बहुत सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखा. कर्फ्यू की वजह से मची अफरा-तफरी के कारण तुर्की के राष्ट्रपति तैयब आर्देगन ने जनता से घर के भीतर रहने की अपील की और भरोसा दिलाया कि कोरोना से जंग में तुर्की सरकार अपनी जनता की सुरक्षा और मदद के लिए सक्षम है. इसके साथ ही राष्ट्रपति ने अगले सप्ताह होने वाले लॉकडाउन का भी पहले से ऐलान कर दिया.
कोरोनावायरस को लेकर तुर्की कड़े प्रतिबंध का इस्तेमाल नहीं कर रहा है. सरकार लोगों से स्टे-होम और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील कर रही है. वहीं स्टे-होम पॉलिसी के तहत केवल 20 साल से कम और 60 साल से ऊपर की उम्र के लोगों पर ही बाहर निकलने पर प्रतिबंध है. कई जानकार तुर्की के 'लॉकडाउन मॉडल' और आयु-विशेष प्रतिबंध को सही मानते हैं. उनका कहना है कि  ऐसे लोग जिनकी संक्रमण के चपेट में आने की ज्यादा आशंका है वो लोग घर में रहें और बाकी लोग जरूरी सुरक्षा के कदम उठा कर अपने काम से घर से बाहर निकल सकते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में लंकास्टर यूनिवर्सिटी में वाइरोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ मोहम्मद मुनीर सीमित लॉकडाउन को वैकल्पिक रणनीति के रूप में देखते हैं और कहते हैं कि स्वस्थ लोगों के बाहर निकलने में कोई नुकसान नहीं है. इसके पीछे उनकी ये दलील भी है कि दुनिया में 80 फीसदी संक्रमित लोग ठीक हो चुके हैं. साथ ही वो लॉकडाउन को संक्रमण फैलने से रोकने का एक तरीका बताते हैं जिसकी वजह से अस्पतालों पर दबाव नहीं आता है.
जहां एक तरफ स्टे-होम पर सरकार का सप्ताह भर ज़ोर रहा तो बाहर  ‘Take Away’  रेस्टोरेंट खुले रहे और कुछ देर के लिए बैंक खुलते रहे. लेकिन पार्क जैसे सार्वजनिक स्थलों में जाने की मनाही रही. वहीं दूसरी तरफ फैक्ट्रियां और दूसरे कारोबारी संस्थान खुले रहे तो निर्माण कार्य भी पहले की रफ्तार से चलता रहा.  दरअसल इसके पीछे ये माना जा रहा है कि हल्के प्रतिबंधों से तुर्की की अर्थव्यवस्था पर असर नहीं पड़ेगा और वो सुचारू रूप से चालू रहेगी.
तुर्की के स्वास्थ्य मंत्री फाहरेतिन कोका का दावा है कि तुर्की में कोरोना संक्रमण की मृत्यु-दर 2 प्रतिशत से थोड़ा ऊपर है और इसकी वजह तुर्की की स्वास्थ्य सेवाओं और इलाज करने का तरीका है जो कि दूसरे देशों से अलग है. तुर्की में कोविड-19 के मरीज़ों के इलाज के लिए हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन एक जापानी एंटीवाइरल दवा के कॉम्बिनेशन के साथ दी जा रही है जिसके नतीजे अच्छे देखे गए.