कोरोना वायरस संकट के बीच महुआ बन गया महिलाओं का सबसे बड़ा हथियार!

महुआ का नाम सुनकर सिर्फ शराब बनाने की बात सामने आती है। लेकिन बालोद जिले में वन विभाग ने महुआ से आचार बनाने का काम शुरू कर दिया है। वन विभाग से संचालित वन धन संग्रहण अंतर्गत महिला समूहों ने महुआ से आचार बनाने का कार्य प्रारंभ किया है। इसकी शुरुआत गुरुर ब्लॉक के ग्राम बड़भूम एवं कर्रेझर और डौंडीलोहारा की 3 समितियों के माध्यम से की जा चुकी हैं। यहां की महिलाएं महुआ का स्वादिष्ट आचार तैयार कर रही हैं। 
जिसे कोरोना का संकट और लॉकडाउन खत्म होने के बाद बाजारों में बेचा जाएगा। वन विभाग की इस पहल की अब जिलेभर में चर्चा होने लगी है, जहां लॉकडाउन में लोगों को घर बैठे रोजगार भी मिल रहा है और महुआ का सही उपयोग भी होने लगा है। डीएफओ सतोविशा समाजदार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कुछ दिनों पहले सभी शासकीय विभागों में पत्र जारी किया था। वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने भी जोर दिया था कि बिना किसी लागत और बिना मशीन खरीदे ऐसा हम क्या कर सकते हैं, जिससे महिलाओं और अन्य लोगों का रोजगार बढ़ सकता हैं। 

इसको ध्यान में रखते हुए गुरुर रेंज अधिकारी से बातचीत कर महुआ से आचार बनाने की पहल गुरुर ब्लॉक से शुरू की गई। यहां के वन अधिकारी पहले से ही इसकी ट्रेनिंग ले चुके हैं। उन्हें मालूम है कि महुआ से आचार कैसे बनाया जाता हैं। न तो इसमें लागत लगती है, न ही मशीन लगेगी। न ही कोई प्रोसेसिंग सेंटर लगेगा और न ही बाहर से कोई अन्य सामानों की खरीदी करनी होगी।
डीएफओ सतोविशा समाजदार ने आगे बताया कि महुआ के एक-एक फूल का आचार बनाया जाएगा। महुआ से अब शराब नहीं बनने दिया जाएगा। महिलाओं की इच्छाशक्ति से महुआ से आचार बनाने की शुरुआत प्रदेश में पहली बार बालोद जिले से की जा रही हैं। गुरुर ब्लॉक के बड़भूम और कर्रेझर एवं डौंडीलोहारा के 3 समितियों में आचार बनाने का कार्य किया जा रहा हैं। ग्राम बड़भूम की जय मां शारदा स्वसहायता समूह की अध्यक्ष शकुंतला कुरेटी ने बताया कि महुआ से शराब न बने और उसकी लत को छुड़वाने के लिए आचार बनाना शुरू किया है। 

हमारे गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में लोग महुआ से शराब बनाते और पीते हैं। महुआ से जब आचार बनना शुरू हो जाएगा तो लोग फिर शराब न पीकर महुआ का अचार खाएंगे। दरअसल वन ग्रामों में बड़ी मात्रा में महुआ के पेड़ हैं। महुआ का फल भी बहुत ज्यादा होता है। जानकारी के मुताबिक जंगल से महुआ को बीनकर लाते हैं। उसे 8 से 10 दिन तक सुखाते हैं। फिर सफाई करने के बाद गर्म पानी में उबालते हैं। उबालने के बाद आधे घंटे धूप से सुखाने के बाद आचार बनाते हैं।