लॉकडाउन में ड्यूटी : कड़ी धूप में सड़क पर पत्तल में भोजन करके कर रहे हैं ड्यूटी का पालन!

पुलिस पर तरह तरह को आरोप लगाने वाले समाज उन लोगों के लिए बीच सड़क में, कड़ी धूप में, बिना बिछावन के पत्तल में पुलिसकर्मियों का इस तरह भोजन करना मजबूरी नहीं है। बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभा कर कोरोना वायरस की महामारी से समाज को बचाने की कड़ी तपस्या है। जिसका पारितोषिक आपके आरोपों के साथ हमेशा इस पुलिस को अक्सर मिलता रहता है। लेकिन उनकी सेवाभाव को ऊपर वाला ही समझेगा और सच्चा पारितोषिक प्रदान करेगा। इसी भावना की प्रेरणा से अपने दायित्व निर्वहन पर अदम्य उत्साह डटे हुए हैं।
पुलिस के इन सिपाही की यह तपस्या आखिर किसके लिए और क्यों ? जब इस कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण से बचने के लिए घर पर रहने की अपील प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। और 21 दिन का लॉक डाउन घोषित कर कानूनी रूप से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गयी है। आज जब हर व्यक्ति सिर्फ अपने तक सीमित हो गया है। अपनी समस्याओं तक सीमित कर रह गया। ऐसे हालात में अपना जीवन जोखिम में डालकर अपनी ड्यूटी निभाने के लिए सड़क पर ही रहना-खाना सहर्ष कर रहे हैं। 

बिना अतिरिक्त पारितोषिक के तो फिर पुलिस का काम व ड्योटी से बड़ी समाज सेवा कुछ नहीं लगती। कोरोना महामारी से बचाने में यदि हम सब अंतर्मन से सहयोग करते तो निश्चय ही पुलिस विभाग के इन जांबाज सिपाहियों की जिंदगी कुछ सुखद बन सकती थी लेकिन समाज के कुछ लापरवाह, गैरजिम्मेदार और हर कानून व व्यवस्था को तोड़ने की ठेका लेने वालों ने इन सिपाहियों की जिन्दगी को सड़क पा लाकर पटक दिया है। अपनी आराम, अपनी नींद त्याग कर अपने बच्चों के सुख-दुख से दूर रहकर 24 घंटे अपनी ड्यूटी निभा रहे है।

जिस तरह से एक सिपाही अपनी ड्यूटी को निभाने के लिए जीवन के अपने सभी सुख समाज को कोरोना से बचाने के तिलांजलि दे देता है। वह हम सब को समाज के लिए अपनी जिम्मेदारी को एहसास कराता है, प्रेरणा देता है कि "मनुष्य एक समाज प्राणी है" इस मानवीय मिथक को चरितार्थ करने के लिए अपना कर्तव्य बोध का समझे और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपना योगदान देकर बौद्धिक व संवेदनशील होने का प्रमाण दें।