लॉकडाउन में मरीजों को अस्पताल ले जाते हैं साजिद, अपनी कार को बना दिया है बिल्कुल एंबुलेंस....

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण पूरे भारत में काफी स्थिति खराब होती नजर आ रही है। "इस समय कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों की संख्या सामने आ जाएगी, लेकिन उन लोगों के बारे में कोई भी बात नहीं करेगा जो की लॉकडाउन के दौरान अस्पताल न पहुंचने की वजह से जान गंवा चुके होंगे. ऐसा कहना है साजिद खान का. जिन्होंने इस मुश्किल घड़ी में अपनी दो गाड़ियों को एंबुलेंस में तब्दील कर दिया है, ताकि जरूरतमंदों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके. आइए जानते हैं इनके बारे में. दिल्ली के रहने वाले साजिद ने मीडिया से खास बातचीत करते हुए बताया कि कैसे उनके मन में एंबुलेंस शुरू करने का विचार आया. उन्होंने लॉकडाउन के दो दिन बाद ही अपनी दोनों गाड़ियों को एंबुलेंस में बदल दिया था.
साजिद ने बताया, जब मैं लॉकडाउन के दो दिन बाद दूध लेने के लिए निकला तो मैंने देखा कि दो बुजुर्ग जो कि पति- पत्नी थे, वह तिलक नगर से पैदल चलकर आ रहे थे, वह राम मनोहर लोहिया अस्पताल जाना चाहते हैं. मैं ये जानकर हैरान हो गया था कि अभी इन्हें तीन घंटे का सफर पैदल चलकर और करना है. इसके बाद मैं घर लौटा और अपनी पत्नी को इस बारे में बताया.

मैंने उनसे कहा, मैं अपनी गाड़ियों को एंबुलेंस में तब्दील करना चाहता हूं. शुरू में मेरी पत्नी घबरा गई थी, लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि देश की मदद करने के लिए ये जरूरी है, लोगों को मदद की जरूरत है. अस्पताल जाने के लिए लोगों के पास पैदल चलने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है. साजिद अपनी गाड़िया खुद ही चलाते हैं, साथ ही गाड़ियों को सैनिटाइज भी करते रहते हैं. उन्होंने कहा, शुरू में पुलिस वाले सवाल जवाब करते थे, लेकिन अब मेरा नंबर सोशल मीडिया पर काफी फैल गया है. ऐसे में मुझे किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है.
साजिद ने बताया मैं पिछले कई हफ्तों से डायलिसिस के मरीजों को मंगलवार और शुक्रवार अस्पताल लेकर जा रहा हूं. मैं ये बात बखूबी जानता हूं, कि इस दुख की घड़ी में हमें एक -दूसरे की मदद करनी होगी. लेकिन दुख होता है जब मरीज एंबुलेंस को फोन मिलाते हैं और उनका फोन नहीं लगता. ऐसे में कई मरीजों की हालात गंभीर हो जाती है. उन्होंने बताया, मालती देवी जो एक प्रेग्नेंट औरत है सफदरजंग अस्तपताल के बाहर सुबह 11:00 से दिन के 3:00 बजे तक वह एंबुलेंस के लिए इंतजार करती रही, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई. उसके बाद सफदरजंग अस्तपताल से मुझे फोन आया, उन्होंने मुझसे कहा, भइया आपकी फ्री एंबुलेंस सर्विस है प्लीज आ जाइए, यहा एक महिला प्रेग्नेंट हैं और हालत गंभीर है, उन्हें एलएनजेपी अस्पताल लेकर जाना है.
मैं तुरंत वहां पहुंचा और महिला को दूसरे अस्पताल लेकर गया. मुझे खुशी है महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है. मैं लोगों की सेवा करके काफी खुश हूं. साजिद ने बताया, मेरे इस काम से मेरी पत्नी भी खुश है, वह समझ गई है उनके पति देश की सेवा में लगे हुए हैं. मेरे घर में भी बच्चे और पत्नी हैं. मुझे उनकी चिंता भी है. लेकिन अगर हम डर कर बैठ गए तो कई लोगों को परेशानी हो सकती है. किसी न किसी को तो ऐसे लोगों की मदद के लिए सामने आना होगा. मैं जानता हूं दुनिया को कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों की संख्या दिखाई देगी, लेकिन कोई उन लोगों के बारे में बात नहीं करेगा जो लॉकडाउन के दौरान समय पर अस्पताल न पहुंचने की वजह से जान गंवा चुके होंगे.