"साहब यहां पर सबकुछ ठीक है, लेकिन घर में ही रहने की बात ही कुछ और है.."

चास प्रखंड के नवनिर्मित भवन में बने क्वारंटाइन सेंटर में 20 मजदूर रह रहे हैं। कोई गिरिडीह का है तो कोई जामताड़ा का। किसी को कोई समस्या नहीं है, पर घर में नहीं रहने का गम जरूर है। शुक्रवार को जब दैनिक जागरण की टीम पहुंची तो लोगों के मन की बात निकल पड़ी। सभी चाईबासा में काम करते थे। वहां से तो ठीक से ही निकले, पर किस्मत ने साथ नहीं दिया और उनकी गाड़ी जैनामोड़ में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। 
उसके बाद वे सब क्वारंटाइन सेंटर पहुंच गए। यहां रह रहे पुदीन अंसारी, मकसूद अहमद, कुतुबद्दीन अंसारी, मोहम्मद अंसारी, अमीर अंसारी, गिरिडीह के हैं। साफिद अंसारी, नबी अहमद, अलबी मियां, अमसुद्दीन अंसारी, इमासुद्दीन अंसारी, करीमुद्दीन अंसारी, रामलाल मंडल, इब्राहिम अंसारी, इंमतियाज अंसारी, एकीक अंसारी जामताड़ा के तो इरफान अंसारी धनबाद के रहने वाले हैं। सभी चाईबासा की एक कंपनी में काम कर रहे थे।

क्वारंटाइन सेंटर की व्यवस्था पर इनका कहना है कि सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। दो समय का भरपेट भोजन मिल रहा है, पर घर में रहने की बात ही कुछ और है। हर घंटे घर वाले फोनकर हाल ले रहे हैं। गुहार लगाई कि प्रशासन जो चाहे जांच करा ले, पर उन्हें बस उनके घर भेज दे। ऐसे वक्त में कम से कम अपने परिवार के साथ तो रह सकेंगे। यहां कैदी की तरह महसूस हो रहा है, जबकि उनका दोष कुछ भी नहीं है।
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