लॉकडाउन में जा रहे थे अपने घर, रास्ते में पत्नी ने दिया एक पुत्र को जन्म!

कोरोना महामारी में कई लोग अपनों व घर से दूर रहकर परेशानियां झेल रहे हैं। इसका अंदाजा प्रवासी महिला मजदूर की कहानी से पता चलता है। यह महिला अपने पति, तीन साल के पुत्र तथा साढ़े चार साल की पुत्री के साथ गुजरात के सूरत से पैदल ही हजारों किमी के सफर पर कानपुर से 60 किमी दूर भोगनीपुर तहसील के टेवंगा गांव (उप्र) के लिए निकल पड़ी थी। इसमें बड़ी बात यह थी कि उक्त महिला नौ माह की गर्भवती थी।
यहां से गुजरने के दौरान पुलिस ने रोककर क्वारंटाइन कर दिया था। तमाम परेशानियां उठाने के बाद महिला ने सोमवार को पुत्र को जन्म दिया। जच्चा व बच्चा दोनों अस्पताल में स्वस्थ हैं। मौजूदा समय में महिला को अपनों का सहारा व देखभाल की जरुरत थी, लेकिन वह हजारों कि मी दूर मनावर में फंसी हुई है। महिला बिन्नू देवी केवट ने बताया कि हम कानपुर के टेवंगा ग्राम के रहने वाले हैं। लॉकडाउन के एक माह पूर्व ही रोजी-रोटी की तलाश में पति प्रमोद व दो छोटे बच्चों के साथ सूरत आ गए थे। 

यहां पति-पत्नी दोनों धागा फैक्टरी में काम करते थे। यहां आने के एक माह बाद ही लॉकडाउन घोषित हो गया। महिला के अनुसार 21 मार्च से फै क्टरी में काम बंद हो गया। मकान के भाड़े के साथ रोजी-रोटी व बच्चों के लालन- पालन का संकट खड़ा हो गया। 25 मार्च को मैंने वहां परीक्षण कराया था। डॉक्टर ने डिलिवरी के लिए एक माह का समय बताया था। किसी प्रकार व्यवस्था नहीं होने पर सोचा कि एक माह में हम अपने घर कानपुर किसी तरह पहुंच जाएंगे। हिम्मत कर पति व बच्चों के साथ 28 मार्च को पैदल निकल गए।

महिला ने बताया गुजरात की सीमा पर एक बस मिली थी। बस वाले ने 200 रुपये लेकर इंदौर तक छोड़ने का कहा था। इंदौर से अन्य व्यवस्था हो जाएगी यह सोच कर हम बस में सवार हो गए। चूंकि बस कुक्षी की थी। इसलिए बस वाले ने धोखा देकर इंदौर की बजाए हमें कुक्षी में ही उतार दिया। वहां से हमने फिर से पैदल यात्रा शुरु की। उनके अनुसार बच्चे कभी भूख से विचलित होते तो कभी पानी के लिए रोते थे। मनावर आने पर पुलिस ने हमें यही रोक लिया। 

31 मार्च से हम मनावर मांगलिक भवन में रुके हुए थे। सोमवार को प्रसव पीड़ा होने पर यहां की एसडीएम दिव्या पटेल को मोबाइल पर बताया। उसके बाद अस्पताल लाकर प्रसव क्रिया की गई। महिला ने बताया मांगलिक भवन में एक-दो बार किसी ने फल दिए थे। यहां न तो स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, न ही दूसरे अन्य प्रबंध। दोनों समय भोजन नियमित रूप से दिया गया। दोनों छोटे बच्चों को पति अस्पताल में ही संभाल रहे हैं। बिन्नूदेवी ने कहा कि यदि हमें अस्पताल से वापस मांगलिक भवन शिफ्ट कर दिया जाए तो बच्चों को संभालने में आसानी रहेगी।