"जिससे पूरी दुनिया को डर, उससे डॉ. पांडे रोज 'खेलते' हैं" कोरोना की लड़ाई में ये दंपती बने खतरों के खिलाड़ी...

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आरएमआरसी के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. अशोक पांडे और उनकी पत्नी व पुलिस क्षेत्राधिकारी चौरीचौरा रचना मिश्रा वास्तव में कोरोना योद्धा हैं। सुबह से देर रात तक ड्यूटी, फिर खुद को परिवार से अलग रखकर सुरक्षित करना चुनौतीपूर्ण है, फिर भी इसे उन्होंने स्वीकार किया। सेवा का ऐसा भाव चढ़ा है कि कक्षा चार में पढ़ने वाले बेटे आयुष्मान को खुद से अलग कर दिया। आयुष्मान 25 मार्च से अपनी नानी के पास रह रहे हैं।
दरअसल, गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के 10 जिलों की जांच आरएमआरसी में हो रही है। इसकी मॉनिटरिंग डॉ. अशोक पांडे के पास है। अब तक कई रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। इसकी चपेट में घर, परिवार न आ जाए, इसलिए सतर्कता के साथ खुद को अलग कमरे में रखते हैं।
जिससे पूरी दुनिया को खौफ, उससे डॉ. पांडे 'खेलते' हैं रोज। गोरखपुर में कोविड-19 के नमूनों की जांच की जिम्मेदारी है आरएमआरसी के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. अशोक पांडे पर, जिस कोरोना वायरस के खौफ ने पूरी दुनिया को हिला दिया है, डॉ. अशोक उसी वायरस की जांच में कई-कई घंटे हर रोज गुजारते हैं। सुबह से लेकर देर रात तक बिना कमर सीधी किए नमूनों की जांच करना अब उनकी आदत में शुमार हो गया है।
परिवार की चिंता किए बगैर वह नमूनों में वायरस तलाशने की प्रक्रिया पूरी करने में जुटे रहते हैं। वायरस भी ऐसा कि एक चूक न जाने कितनों को संक्रमण दे जाए, उनके लिए भी यह खतरा हर पल बना रहता है। बावजूद इसके बस एक ही लगन कि नमूना आया तो विश्लेषण करके जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करो।
डॉ. अशोक पांडे बताते हैं कि परिवार को हर वक्त चिंता सताती है, लेकिन जिम्मेदारियां इतनी बड़ी हैं कि वह चिंता लैब में घुसते ही पीछे छूट जाती है। खुशी इस बात की है कि देश सकंट में है तो इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है, जिसे कर्तव्य निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेफ्टी किट के बिना सेंटर में नहीं जाता हूं। पूरी तरह से सुरक्षित होकर जांच की जाती है। जिससे की कोई और संक्रमण का शिकार न हो।

पुलिस क्षेत्राधिकारी रचना मिश्रा कहती हैं परिवार, यह एक बड़ा शब्द है। अपनों के लिए तो सब जीते हैं। जिस दिन वर्दी पहनी उस दिन से समाज को ही परिवार मानने लगी। आज वह वक्त है, जब इस परिवार के लिए कुछ करने का समय है। शायद यही वजह है कि घर की जिम्मेदारियों को भूल गई हूं। पहली प्राथमिकता कोरोना संकट से जनता को बचाना है।
उन्होंने आगे कहा कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराना है। सुबह साढ़े नौ बजे घर से निकलना होता है। कोशिश सिर्फ ड्यूटी के दौरान आम लोगों को इस बीमारी से दूर रखने की होती है। हां, एक बात और कोई भूखा ना सोने पाए, इसका कुछ इंतजाम करके निकलती हूं। सुबह उठने के साथ ही घरवालों के लिए नाश्ते की व्यवस्था व अन्य लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करती हूं।