अपनों से बिछड़कर शेल्‍टर होम पहुंच गए दो मासूम, वीडियो कॉल में अम्‍मी को देखकर आ जाते हैं आंसू!

चार साल का आजम खान और 10 साल का दिलशाद। यह उम्र माता-पिता के साथ रहकर खेलने कूदने की है, लेकिन दोनों 21 दिन से उनसे जुदा हैं। समालखा में भापरा रोड स्थित मॉडल सीसे स्कूल के हाल में बने राहत शिविर में चाचा अली मोहम्मद के साथ रह रहे हैं। यहां खाने पीने की कोई दिक्कत नहीं है, परंतु माता पिता की याद उन्हें सताती है। जब भी दोनों दिल में उतर आते हैं तो आंखों से आंसू टपकने लगते हैं। वहीं बच्चों से अलग माता-पिता भी बैचेन है।
उत्तर प्रदेश के एटा जिला के गांव थरौली के रहने वाले अली मोहम्मद ने बताया कि हिमाचल के ऊना में उनके रिश्तेदार काम करते हैं। वो और उसका भाई भी काम की तलाश में वहां पहुंचे। सप्ताह ही बीता था कि बड़े भाई के बच्चे आजम और दिलशाद भी अपनी मां के साथ वहां आ गए। इसी दौरान लॉकडाउन लग गया। भाई वहां से बाइक पर किसी तरह निकलकर गांव पहुंच गया। 

वो रुकना चाहते थे, लेकिन एक तो जेब खर्च नहीं बचा और ऊपर से मकान मालिक ने कमरा खाली करने के लिए बोल दिया। फिर भूखे मरने से अच्छा तो घर के लिए पैदल निकलना ही अच्छा लगा। गांव के ही शहजाद के परिवार के साथ वो भी दोनों भतीजों को लेकर घर के लिए पैदल ही निकल पड़े। किसी तरह से करीब 250 किलोमीटर का सफर तय करके समालखा तक पहुंचे और प्रशासन ने आगे जाने से रोकते हुए राहत शिविर में ठहरा दिया। अली मोहम्मद ने बताया कि राहत शिविर में किसी तरह की समस्या नहीं है। 

वक्त पर अच्छा खाना मिलता है। हर सुविधा है, लेकिन भतीजे आजम और दिलशाद का माता पिता से अलग होने के कारण दिल नहीं लग पा रहा है। उन्हें जब भी माता पिता की याद आती है तो उनकी आंखों से आंसुओं छलकने लगते हैं। जो उसे देखी नहीं जाती है। वो उनका दिल लगाने के लिए वीडियो कॉङ्क्षलग कराकर भाई से बात करवाते हैं। बच्चे उसके बाद बमुश्किल चुप होते हैं। बच्चों से अलग होकर भाई और भाभी भी परेशान हैं।