लॉकडाउन में जब "आसमान से गिरे खुजूर पर अटके" जानिए पूरा मामला!

परदेश में इस गरज से गए थे कि चार पैसे कमाएंगे। लेकिन वहां जाकर मुसीबत में फंस गए। कोरोना को लेकर लॉकडाउन हुआ तो वहीं घरों में बंद हो गए। आमदनी का कोई जरिया नहीं था। जैसे-तैसे खुद तो भूखे-प्यासे रहकर सब्र किए थे। जब बच्चों के लिए दूध तक के लाले पड़ गए तो लगा कि ऐसे भूखों मरने से बेहतर है कि अपने गांव लौट चलें। यहां आकर भी क्वारंटाइन प्रोटोकॉल पूरा कर रहे हैं।
थाना अमृतपुर के गांव गहलार निवासी अवनीश, पत्नी आशु व तीन वर्षीय पुत्री पारुल व छोटे भाई अनुज के साथ हरियाणा के रोहतक शहर में रहकर एक फैक्ट्री में लोहा गलाने का काम करते थे। लॉकडाउन में फैक्ट्री बंद होने के कारण घर पर ही रहना पड़ा। कुछ दिनों में ही घर में रखा राशन खत्म हो गया। जब दुधमुंहे बच्चे को दूध के भी लाले पड़ने लगे तो पत्नी व भाई के साथ पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। हसनगढ़ पहुंचते ही पकड़ लिए गए तथा एक माह तक क्वारंटाइन में भेज दिए गए। 

उसके बाद बस से घर के लिए भेजा गया तो भोजपुर महाविद्यालय पहुंच गए। जनपद में आने के बाद भी क्वारंटाइन के कारण घर नसीब नहीं हो रहा है। छह साथियों के साथ क्वारंटाइन में पहुंचे थाना कंपिल निवासी नेमचंद ने बताया कि हरियाणा के हिसार में सब्जी बेचते थे। लॉकडाउन में धंधा बंद हो गया। जब भुखमरी पर पहुंच गए तो छह साथियों सहित पैदल घर आ रहे थे। तभी भट्टू में पकड़ लिया गया तथा हिसार स्थित क्वारंटाइन सेंटर में करीब एक महीने तक रखा गया, उसके बाद यहां भेज दिया गया है।