लॉकडाउन में दुबई से वसीम और मुंबई से आफरीन ने कहा : "कबूल है कबूल है कबूल है" मेरठ से काजी ने पूरी कराईं रस्में

मेरठ के शाहपीरगेट निवासी वसीम अहमद और मुंबई निवासी सैय्यद आफरीन बानो का निकाह आज बेहद अनोखे अंदाज में हुआ। रविवार को सात समंदर पार से वसीम और आफरीन निकाह कबूल कर शादी के बंधन में बंध गये। नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन ने निकाह पढ़ाया, जिसमें पिता नदीम सिद्दीकी समेत 4 अन्य लोग निकाह के गवाह बने।
शाहपीरगेट पूर्वा अब्दुल वाली निवासी नदीम सिद्दीकी के 28 वर्षीय बेटे वसीम अहमद पांच वर्ष से सऊदी अरब के आबूधाबी में एक शॉपिंग मॉल में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। मेरठ निवासी वसीम का रिश्ता छह महीने पहले मुंबई निवासी सैय्यद वसी रजा की बेटी सैय्यद आफरीन बानो से हुआ था। आफरीन एमबीए की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। 22 मार्च जनता कर्फ्यू के बाद से लगातार लॉकडाउन के चलते परिवारों के लोग लाल खत भी नहीं भेज सके। 

लेकिन लॉकडाउन की सीमाओं में रहते हुए दोनों परिवारों ने तय समय के अनुसार ही निकाह करने का मन बनाया। जिसमें दूल्हा और दुल्हन ने भी हंसी-खुशी हामी भरी। रविवार 19 अप्रैल को दूल्हा और दुल्हन को फोन पर वीडियो कॉलिंग द्वारा कांफ्रेंसिंग पर लेकर निकाह पढ़ाने की तैयारी हुई। जिसको अमलीजामा पहनाने में नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। शाहपीरगेट स्थित वसीम के आवास पर पिता नदीम सिद्दीकी के साथ हाजी अनवार अहमद, आफान इम्तियाज, चौधरी इरफान की मौजूदगी में नायब शहरकाजी ने निकाह पढ़ाया। जिसके बाद निकाह के लिए छुआरे भी बांटे गए।

वसीम के पिता नदीम सिद्दीकी ने बताया लॉकडाउन में जीवन पूरी तरह प्रभावित है। ऐसे में नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन ने ऑनलाइन निकाह पढ़वाने का मशवरा दिया। तय समय के अनुसार 19 अप्रैल को दोनों परिवारों के बीच ऑनलाइन निकाह होने के बाद नए रिश्ते की शुरुआत हुई। निकाह पढ़ाने के बाद हदीये के तौर पर नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन को वसीम के पिता ने 5 हजार बतौर हदीये (दक्षिणा) पर दिए गए। 

लेकिन नायब शहरकाजी ने इस रकम को लॉकडाउन में जरूरतमन्दों पर खर्च करने के लिए कहा है।  ऑनलाइन निकाह की खास बात रही कि बिना दहेज और बिना शोर-शराबे के दूल्हा-दुल्हन शादी के बंधन में बंधे। नायब शहरकाजी ने बताया कि शरीयत में फिजूलखर्ची सख्त मनाही है। लॉकडाउन में निकाह पढ़वाकर दोनों परिवारों ने अच्छी पहल की है।