लॉकडाउन में मोबाइल गिरवी रखकर दवा लेने जा रहा था रिक्शेवाला, DM ने रोककर किया उसकी मदद...

कोरोना के प्रकोप और लॉकडाउन के दौरान डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी जहां अपनी जान को जोखिम में डालकर कोरोना मरीजों के इलाज में लगे हैं। वहीं ऐसे संकट के दौर में पुलिसकर्मी और बड़े अधिकारी भी अपना सबकुछ एक तरफ रखकर आम लोगों की मदद में जुटे हुए हैं। देश के कई हिस्सों से मानवीयता की मिसाल पेश करती ऐसी खबरें आ रही हैं।
ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के रामपुर से सामने आई है। दरअसल यहां लॉकडाउन के दौरान एक रिक्शेवाले को सड़क पर घूमते देख डीएम आञ्जनेय कुमार सिंह ने रोककर इस तरह बाहर घूमने का कारण पूछा। डीएम ने उसे अपने अधिकारी होने के बारे में नहीं बताया। इस पर रिक्शेवाले ने बताया कि- उसकी तबियत ठीक नहीं है, इसलिए दवा लेने जा रहा है...। साथ ही उसने पैसा ना होने की बात भी बताई। रिक्शेवाले ने बताया कि- वे अपना मोबाइल 150 रुपए में किसी आदमी को देकर दवा लेने जा रहा है।

रिक्शेवाले की बात सुनकर डीएम आञ्जनेय कुमार सिंह का दिल पसीज गया। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार- डीएम ने रिक्शेवाले को तुरंत एक महीने की दवा मंगवाकर दी। साथ ही 150 रुपए मोबाइल छुड़ाने के लिए दिए और कहा- मोबाइल मिलते ही उन्हें फोन करके बताए। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार- यह सब लेते हुए रिक्शेवाला बार-बार पैसे को अपने माथे से लगाता रहा। उसकी आंखों में इस संकट की घड़ी में मिली नई जिंदगी को देखकर आंसू भी थे।

प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार- डीएम ने रिक्शेवाले से पूछा कि उसे किस और चीज की जरूरत तो नहीं? इस पर रिक्शेवाले ने बताया कि- '...साहब घर में राशन नहीं है। जेब में दाम भी नहीं है। रिक्शा नहीं चलाया है लॉकडाउन वाले दिन से...' रिक्शेवाले की यह बात सुनते ही डीएम सिंह ने रिक्शेवाले के घर में राशन भी भिजवाया।

बता दें, डीएम आञ्जनेय कुमार सिंह ने लॉकडाउन के दौरान एक प्राइवेट आउटसोर्सिंग कंपनी को शहर में सफाई के लिए रकम वसूली करते रंगे हाथ पकड़वाया है। मौके पर ही कंपनी पर एक लाख का नकद जुर्माना भी किया। एक पत्रकार की ओर से जब डीएम सिंह से फोन पर इस बाबत पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि- शासन ने उन्हें जनता के लिए ही जिलाधिकारी बनाकर भेजा है। मैंने अपने कर्मचारियों को भी यही निर्देश दिए हुए हैं कि कोरोना जैसी महामारी और लॉकडाउन में किसी को भी परेशानी नहीं होनी चाहिए।