चायवाले का बेटा जब IAS अफसर बनकर गांव लौटा तो पिता की आंखों में घंटों देखता ही रहा! वजह जानें...

मेहनत वो चाबी है जो हर किस्मत का ताला खोलने का दम रखती है, अगर मजबूत इरादों के साथ लक्ष्य का पीछा किया जाए, तो राह में आने वाली हर मुश्किल खुद-बख़ुद अपना रास्ता बदल लेती है, ये कहना है राजस्थान के जैसलमेर जिले के रहने वाले देशल चरन का जिनकी एक चाय वाले के बेटे से आईएएस अधिकारी बनने कहानी हर किसी को प्रेरित करती है।
देशल के पिता कुशलदान चरन गांव में ही एक चाय की दुकान चलाकर पूरे परिवार का गुजारा करते हैं जिसमें उनको मिलाकर वो 7 भाई बहन हैं। 10वीं तक सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाले देशल ने कभी सोचा नहीं था कि वो आईएएस अधिकारी बन गांव लौटेंगे।
12वीं के बाद IIIT जबलपुर से इंजीनियरिंग के आखिरी साल में यूपीएससी की तैयारी शुरू करने वाले देशल ने उसी साल ठान लिया था कि अब आईएएस बनकर ही गांव लौटना है। अपने आईएएस अधिकारी बनने की यात्रा बताते हुए देशल कहते हैं कि मैंने मेरे आस-पास के गांवों में राज्य सेवा और केंद्रीय सेवा की नौकरियों के बारे में सुना, इसके साथ ही यह भी पता चला कि इस तरह की नौकरी लगने के बाद गांव और समाज में लोग आपके बहुत सम्मान देते हैं।
मेरे भाई की प्रेरणा से मैंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने का फैसला लिया और दिन-रात एक कर दिए। इंजीनियरिंग कोर्स के लास्ट ईयर से तैयारी शुरू करने वाले देशल कहते हैं कि मैंने मेहनत और लग्न का पाठ अपने पिता से ही सीखा है, संघर्ष और कड़ी मेहनत की कीमत हमें पिता ने ही बचपन में सिखाई।
आईएएस बनकर गांव लौटा तो पिता की आंख में देखना चाहता था। देशल को साल 2017 में सफलता मिली और जब वह 82 रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा पास कर अपने गांव लौटे तो उनका पिता के सामने जाना बहुत ही भावुक पल था। यह कहानी आपको कैसी लगी आप कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं और चुनौतियों का सामना करने वाले ऐसे ही लोगों की कहानी हम आप तक पहुंचाते रहेंगे।
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