इतनी ज्यादा बेरहम मौत कि अपनों की 'आग' भी नसीब नहीं हुई, PPE किट पहनकर डोम ने किया मुखाग्नि

मौत बेरहम तो थी मगर इतनी नहीं। कम से कम अपने लिपटकर रो लेते थे। मरने वाले को गंगा घाट तक चार लोग कांधा दे देते। अपनों के हाथ मुखाग्नि मिल जाती थी मगर कोरोना से हुई मौत ऐसी नहीं है। शुक्रवार को पटना एम्स में कोरोना से मौत के बाद वैशाली के 37 वर्षीय नवल किशोर राय को अपनों की 'आगÓ तक नसीब नहीं हुई। बगल के आइसोलेशन वार्ड में निगरानी में रखे गए पत्नी, भाई और बहन अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके। उनके आंसू पोंछने वाला भी कोई नहीं था।
संक्रमण के डर से एम्स के डॉक्टरों ने शव को चार लेयर में पैक किया था। शव पर पहले केमिकल लगाया गया फिर कपड़े के कफन से ढका गया और इसके बाद दो लेयर प्लास्टिक की शीट में पैक कर शव को स्वास्थ्य विभाग और थाने की निगरानी में पांच की संख्या में मौजूद स्वजनों को सौंप दिया गया। एम्स के नोडल अधिकारी डॉ नीरज अग्रवाल व दंडाधिकारी इश्तेयाक अजमल ने बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की तय गाइडलाइन के अनुसार ही प्रशासन की निगरानी में शव का अंतिम संस्कार कराया गया है। 

जिला प्रशासन की मुस्तैदी के बीच नवल किशोर राय के शव का अंतिम संस्कार बांसघाट पर मुख्य सड़क से पांच किलोमीटर दूर गंगा किनारे किया गया। शव वाहन के साथ निजी गाड़ी से नवल के पांच रिश्तेदार बांसघाट पहुंचे तो मगर उन्हें शव जलाने वाले स्थान तक जाने की इजाजत नहीं मिली।  इसके अलावा अस्पताल प्रशासन, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी घाट पर मौजूद थे। 
बांसघाट मोड़ से दो डोमराजा, पंडित और एक रिश्तेदार को प्रशासन ने सैनिटाइज कराने के बाद पीपीई किट पहनाई। बांसघाट पर डोमराजा ने पीपीई किट पहनकर नवल के शव को मुखाग्नि दी। कोरोना पीडि़त के शव जलाने को लेकर प्रशासन को दियारा के ग्रामीणों का विरोध भी सहना पड़ा। शुक्रवार की शाम अंत्येष्टि के लिए लकड़ी की शैया तैयार थी। वाहन के पहुंचते ही शव को उतारकर शैया पर रख भी दिया गया था अभी श्राद्ध-कर्म शुरू ही हुआ था कि इस बीच दियारा से कुछ ग्रामीण पहुंच गए और उन्होंने शव जलाने का विरोध किया। 
सूचना पर बुद्धा कॉलोनी थानाध्यक्ष रविशंकर सिंह पहुंचे। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया और बताया कि इससे आसपास के इलाके में कोई प्रकोप नहीं पड़ेगा। तब वे शांत हुआ। इसके बाद डोमराजा ने मुखाग्नि के लिए एक लकड़ी में आग लगाकर रिश्तेदार के हाथ में दी और फिर उन्हें दो किलोमीटर दूर भेज दिया। इसके बाद उस लकड़ी से डोमराजा ने ही मुखाग्नि दी। शव जलने तक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी घाट पर मौजूद रहे।