UP में खांसने के बाद अंधे होकर मर रहे हैं कुत्ते, ग्रामीणों में दहशत, दिया गया जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के बाह से अजीबोगरीब खबर सामने आई है। यहां की एक ग्राम पंचायत के दो मजरों में लगभग 20 कुत्तों के खांसने के बाद अंधे होकर मरने की घटना से गांव वालों में दहशत व्याप्त है। प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई तो लेखपाल की रिपोर्ट पर बाह के एसडीएम ने पशुपालन विभाग की टीम को जांच के निर्देश दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार चंबल नदी की कछार में बसे जेबरा ग्राम पंचायत के मजरे पुरा डाल और पुरा शिवलाल में तीन दिन में खांसने के बाद अंधे हुए करीब 20 कुत्ते मर गए है।
इसे कोरोना का साइड इफेक्ट मान कर ग्रामीणों और पशुपालकों में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों ने कुत्तों के मरने की जानकारी लेखपाल राकेश कुमार को दी। लेखपाल ने तहसील प्रशासन को रिपोर्ट भेजी। जिसे गंभीरता से लेते हुए बाह के एसडीएम अब्दुल बासित ने पशु चिकित्साधिकारी बाह धर्मेंद्र कुमार को टीम के साथ मौके पर जाकर परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम बाह ने लेखपाल की मौखिक रिपोर्ट के हवाले से कुत्तों के मरने की घटना की पुष्टि की है और मौके पर वेटनरी डॉक्टर को भेजे जाने की बात कही है। उनका कहना है कि पशु चिकित्साधिकारी की रिपोर्ट आने के बाद ही वे कुछ कह सकते हैं।

खाना न मिलने से खूंखार हुए कुत्ते
कुत्तों के मरने की क्या वजह हो सकती है, यह तो जांच के बाद ही मालूम होगा लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन में खाने के लिए पर्याप्त भोजन न मिलने और गर्मी से आवारा कुत्ते खूंखार हो गए हैं। ये कुत्ते बाहर निकलने वाले व्यक्ति पर हमला कर सकते हैं। सामान्य दिनों के मुकाबले लॉकडाउन में कुत्ता काटन की घटनाएं बढ़ी हैं और अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या भी ज्यादा है। जिला अस्पताल में फ्लू ओपीडी और ऐंटी रैबीज वैक्सीन की ओपीडी चल रही है। ऐंटी रैबीज की ओपीडी में 80-120 मरीज हैं। 
डॉक्टरों को मरीजों से पता चला कि घर के पास ही सड़क, गलियों में कुत्ते ने हमला कर दिया। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि जानवर के काटे मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। सामान्य दिनों के मुकाबले लॉकडाउन में एआरवी लगवाने आ रहे मरीजों में जख्म भी ज्यादा पाए जा रहे हैं और घाव भी गंभीर मिल रहे हैं। ओपीडी में आए लोगों में सबसे ज्यादा कुत्तों ने टांगों पर काटा। ऐसे करीब 90 फीसदी मरीज रहे। कमर-कूल्हे, पेट और हाथों के पास करीब दस फीसदी लोगों को कुत्तों ने काटा।