11 हजार रुपये किराया नहीं दे सके तो गिरवी रख लिया 5 लाख का ट्रैक्टर

अमरोहा के जोया में हाईवे किनारे शनिवार दोपहर साढ़े बाहर बजे सार्वजनिक रसोई के पास छांव में सुस्ता रहे लोग ट्रैक्टर-ट्राली में सवार होने लगे। रोक कर बात की की तो मुखिया ने अपना धमेंद्र महतो निवासी गांव पुरसोई थाना विथान जिला समस्तीपुर (बिहार) बताया। धर्मेंद्र की कहानी सुनकर उसके दर्द का अहसास हुआ। बताया वह पंजाब के जिला चंडीगढ़ के पंचकूला क्षेत्र के कस्बा जीरकपुर में किराए के मकान में रहते थे। एक बड़ा हॉल किराए पर लिया था। वहां दो ट्रैक्टर-ट्राली थे।
पत्नी स्वेता व गांव के ही छह लोग भी साथ ही निर्माणाधीन इमारतों में टै्रक्टर-ट्राली से ही मजदूरी करते थे। लॉकडाउन में काम-धंधा बंद हो गया। जितना कमाया था, सब खर्च हो गया। वहां कोई मदद नहीं मिली। मकान का दो महीना का किराया ११ हजार रुपये हो गया। धर्मेंद्र ने बताया कि ले-देकर हमने पांच हजार रुपये डीजल के लिए जुटाए तथा घर जाने की ठानी। किराया न मिलने पर मकान मालिक अड़ गया। उसने एक ट्रैक्टर गिरवी रखने की शर्त रखी। मिन्नत भी की, पर धमकी देने लगा। घर जाना था, भूखा मरने से बेहतर ११ हजार के बदले पांच लाख का ट्रैक्टर मकान मालिक को सौंप आए। फिलहाल किसी भी सूरत में घर पहुंचना है।

500 रुपये में बना पास

धर्मेंद्र ने बताया कि ट्रैक्टर का पास बनवाने में पांच सौ रुपये खर्च हुए। शुक्रवार दोपहर भूखे पेट सामान समेट कर घर के लिए निकले। ताकि अपनी माटी में जाकर सुकून की सांस मिले। पंजाब के बाद बाद में हरियाणा पुलिस ने परेशान किया। डेरावासी व अंबाला होकर बागपत जिले से यूपी में प्रवेश किया। सुबह बागपत में पुलिस ने केले खिला दिए थे। अब यहां खाना खाया है।

गांव से बाहर न जाएंगे

धर्मेंद्र के साथ उसके ही गांव के शिवकुमार, रमाकांत, जयकांत ङ्क्षसटू, अमरेंद्र, जितेंद्र, बब्बन कुशवाहा व गोलू का कहना था कि अब घर पहुंच जाएं। उसके बाद रूखी-सूखी परिवार के साथ खा लेंगे लेकिन, अपना गांव-कस्बा छोड़ कर नहीं जाएंगे। वहीं मेहनत मजदूरी करना मंजूर है। धर्मेंद्र का कहना है कि लॉकडाउन खुलेगा तो ट्रैक्टर लेने वापस लौटेंगे।