12 साल की जमाई अपनी गृहस्थी छोड़कर फिर से लौट रहे हैं अपने गांव

घर से हजारों किलोमीटर दूर रहकर 12 साल तक मेहनत की और किसी तरह से गृहस्थी बसाई, लेकिन लॉक डाउन के चलते घर का सारा सामान छोड़कर गांव लौटने को मजबूर हैं। सामान ले जाने के लिए भाड़ा नहीं था। इसके चलते सारा सामान मकान मालिक को ही सौंपकर चल दिए। अहमदाबाद में रहने वाले रिक्शा चालक रिंटू मंडल मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हैं। 
काम की तलाश में अहमदाबाद गए। वहां 12साल से रह रहे थे। लॉक डाउन के चलते काम बंद हो गया। घर में पत्नी पांच महीने की बच्ची और नौ साल का बेटा है। किसी तरह घर चला रहे थे। रुपए खत्म हुए तो मां से बोलकर अपनी एक बीघा जमीन गिरवी रखवाकर 50 हजार रुपए बुलवाए। रिंटू का कहना है कि वहां पर किसी तरह से गुजर बसर कर रहे थे, लेकिन अब रुपए भी खत्म हो चले थे। वहां खाने-पीने के सामान के रेट इतने ज्यादा हो गए हैं कि वह ज्यादा दिन घर से बुलाए रुपयों से परिवार नहीं पाल सकते थे। 

इसके चलते गांव लौट रहे हैं। अहमदाबाद में किराए के घर में रहते थे। गृहस्थी का सामान १२ साल की मेहनत में जुटाया, लेकिन उसे मकान मालिक को ही सौंपकर निकल पड़े। उनके पास इतने रुपए नहीं थे कि गाड़ी का किराया दे सकें। किसी तरह इस उम्मीद में अभी तक चल रहा था कि चौथी क्लास में पढ़ रहे बच्चे का स्कूल चालू हो जाएगा, लेकिन अब गांव में जाकर देखेंगे।

बेटमा में कल रात को यह परिवार खाने की तलाश में भटक रहा था। उनकी मुलाकात अप्पू कुमरावत से हुई तो उन्होंने खाने का इंतजाम कराया। गोविंद दरबार, योगेश पंचोली ने बच्ची के लिए दूध के पैकेट और फल उपलब्ध करा दिए, ताकि रास्ते में परेशानी न हो। रात ज्यादा होने के कारण सफर करना ठीक नहीं था। इसके चलते गार्डन मालिक तरुण बियाणी से बात की गई, तो उन्होंने रात ठहरने की व्यवस्था कर दी। आज सुबह परिवार अपने घर के लिए रवाना हुआ।