150 रुपये किलो वाली प्याज को 50 पैसे का भी भाव नहीं, खून के आंसू रो रहे हैं किसान

प्याज ही तो है जो नेताओं के आंखों में आंसू ला देती है। सत्ता तक बदलने की क्षमता है। पर आज वही प्याज कौड़ियों के भाव बिक रही है तो कोई पूछने वाला नहीं जबकि गर्मी के दिनों के लिए यह रामबाण है। फिर भी एसके किसानों की झोली खाली है। किसानों को उम्मीद थी कि साल के शुरूआत में जो प्याज डेढ सौ रुपये किलो के भाव बिकी उसका उत्पादन ज्यादा किया जाए तो मालामाल हो जाएंगे। लेकिन कौन जानता था कि कोरोना इस कदर रुलाएगा।
आलम यह है कि जनवरी के प्याज के भाव को देखते हुए किसानों ने रिकार्ड 30 हजार मीट्रिक टन से भी ज्यादा के प्याज का उत्पादन किया। आस थी कि पैदावार अच्छी हुई है तो अच्छे दाम भी मिलेंगे। लेकिन कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। एक तो कोरोना के चलते लॉकडाउन, ऊपर से मौसम की मार ने उनकी कमर ही तोड़ दी है। प्याज को खेत से निकल कर मंडियों तक पहुंचने का इंतजार है। लेकिन लॉकडाउन के चलते मंडियों में प्याज की मांग ही नहीं है। बाहरी व्यापारी तो आ ही नहीं पा रहे।

ऐसे में इन किसानों की प्याज कोई एक रुपये किलो के भाव खरीदने को राजी नहीं। जिला प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक गेहूं खरीद में व्यस्त बताए जा रहे हैं। उधर प्याज सड़ने लगी है। चार एकड़ में प्याज की फसल उगाने वाले रामकिशुन कुशवाहा का कहना है कि आधी प्याज खेत से निकाल ली गई है। इसका भाव एक रुपये भी नहीं मिल रहा। ऐसे में आधी प्याज खेतों में ही सड़ने को छोड़ दी है।

बता दें कि सतना में देश की सबसे अच्छी गुणवत्ता वाली प्याज की पैदावार होती है। इसकी मांग देश के बाहर बांग्लादेश तक है। पड़ोसी राज्यों में जिले की प्याज की मांग अधिक होने से दूसरे राज्य के प्याज व्यापारी गांव में आ कर सीधे खेत से ही प्याज खरीद लेते रहे। किसानों की 70 फीसद प्याज तो खेतों से ही बिक जाया करती थी। लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते बाहर के व्यापारी आ नहीं सके। लिहाजा प्याज खेतों में सड़ रही है।

"अभी प्रदेश सरकार से प्याज खरीद को लेकर कोई आदेश नहीं है। मंडी बोर्ड से प्याज खरीदी के लिए दिशा निर्देश आते ही मंडी में प्याज की डाक शुरू करा दी जाएगी।"- राजेश गोयल, सचिव कृषि उपज मंडी सतना

"प्याज खेत से निकाल ली है पर घर में रखने का इंतजाम नहीं है। सरकार समर्थन मूल्य पर प्याज की बिक्री की व्यवस्था करे अन्यथा किसान बर्बाद हो जाएंगे।" राकेश उपाध्याय, प्याज उत्पादक किसान