17 दिन में 1672 किलोमीटर साइकिल चलाकर घर पहुंच गया युवक, परिवारवालों को दूर से देखकर ही चला गया

लॉकडाउन में घर वापसी की जद्दोजहद कर रहे प्रवासी कामगारों की एक से बढ़कर एक कारुणिक दास्तां सामने आ रही है। एक ऐसी ही दास्तां कोल्हुई के बेलौही निवासी रामधनी की है। लॉकडाउन में मुंबई से घर निकलने का जब रामधनी के सामने कोई उपाय नहीं दिखा तो उसने डेढ़ हजार रुपये में पुरानी साइकिल खरीदी और 17 दिनों में नाप दी 1672 किमी की दूरी। शनिवार को वह गांव पहुंचा। साइकिल से ही घर के सामने पहुंचा और दूर से ही परिजनों को देखकर प्राथमिक विद्यालय में जाकर क्वारंटीन हो गया।
लॉकडाउन में देश के महानगरों से पलायन का सिलसिला अब तेज हो गया है। हर दिन महराजगंज जिले में औसतन पांच हजार मजदूर फरेंदा में बनाए गए जिला स्तरीय आश्रय स्थल में पहुंच रहे हैं। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उनको लक्षण के हिसाब से घर या जिला मुख्यालय पर क्वारंटीन कराया जा रहा है। इसमें कोई बस से पहुंच रहा है तो कोई ट्रक से। जबकि बेलौही के रामधनी जैसे बहुत से लोग पैदल या साइकिल से ही लगातार गांव पहुंच रहे हैं।

दरवाजे की मिट्टी चूम चला गया क्वारंटीन होने रामधनी शनिवार को जब बेलौही गांव में साइकिल चलाते हुए अपने घर पहुंचा तो परिजनों की खुशी देखते ही बनी। दरवाजे पर साइकिल से उतरने के बाद मिट्टी को चूमा। परिजनों को दूर रहने का सुझाव दिया। कहा कि मुम्बई से आया हूं। वहां कोरोना का संक्रमण बेकाबू है। कौन कोरोना से संक्रमित है, इसका पता नहीं चल पा रहा है। सामाजिक दूरी बचाव का सबसे बेहतर उपाय है। घर आ गया तो दुबारा जिन्दगी मिल गई।