नेत्रहीन पत्नी, 2 साल की बेटी, 50 साल के वास्ताराम तय कर रहे हैं जीवन की सबसे लंबी यात्रा

गोवा के पितरदेवी सीमा की ओर जाते समय वास्ताराम मस्के के हाथ भरे हुए थे। चिलचिलाती धूप में हाइवे से नीचे उतरते हुए, उन्होंने एक हाथ से अपनी नेत्रहीन पत्नी को सहारा दे रखा था तो दूसरे हाथ में अपनी दो वर्षीय बच्ची कुशी को गोद में लिए थे। कंधों पर कपड़ों और सामान से भरा बैग टंगा था। 50 वर्षीय के वास्ताराम पतरादेवी से लगभग 600 किलोमीटर दूर औरंगाबाद में अपने गांव के लिए निकले थे।
वास्ताराम ने बताया, 'मैं कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने के लिए पिछले साल दिसंबर में गोवा आया था, लेकिन मैं अब यहां नहीं रह सकता। अब मैं अपने परिवार के साथ घर जा रहा हूं। कब पहुंचूंगा पता नहीं, पर अपने जीवन से सबसे लंबी यात्रा मैंने शुरू कर दी है।' मस्के हजारों प्रवासियों में से एक हैं जो राज्य की सीमाओं की ओर गोवा के राजमार्गों पर चल रहे हैं। लंबी यात्रा पर उनका यह पहला चेकपोस्ट है। कई लोगों ने यात्रा परमिट मांगी लेकिन असफल रहे।

वास्ताराम ने कहा, 'हां, मैं अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित हूं, लेकिन मैं इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता। यहां तक कि अगर मुझे इन दिनों गले में खराश भी होती है, तो मुझे लगता है कि मुझे कोरोना हो गया है।' डोडामार्ग में, एक पुलिसकर्मी ने स्वीकार किया कि उनके पास जांच करने के लिए बहुत कम लोग हैं। वह खुद रोज लगभग 10-15 फंसे हुए लोगों को गोवा में प्रवेश करते हुए देखते हैं।