अहमदाबाद से लौटा मजदूर गांव से 2 किमी दूर खेत में पेड़ पर झूला डालकर खुद को किया क्वारंटीन

राजस्थान के करौली जिले में एक प्रवासी मजदूर अपने गांव एवं परिवार को महामारी से बचाने के लिए खुद को क्वारंटीन करने का अनूठा तरीका अपनाकर अन्य लोगों को प्रेरणा दे रहा है। देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते लॉकडाउन में रोजगार नहीं मिलने पर घर लौटे प्रवासी मजदूर को चिकित्सा विभाग ने 14 दिन के लिए क्ववारंटीन होने के निर्देश दिए।
ऐसे इस प्रवासी मजदूर ने परिवार व गांव को सुरक्षित रखने के लिए खुद को घर से 2 किलोमीटर दूर स्थित अपने खेत में नीम के पेड़ पर झूला बनाकर रहना शुरू किया है। पेड़ पर ही उसने अपना बैग लटका रखा है। बता दें कि करौली जिले के गुढ़ाचंद्रजी के तिमावा गांव में 16 मई को कार द्वारा अहमदाबाद से आए प्रवासी मजदूर पिंटू मीणा ने यह कदम उठाया है। पिंटू मीना पेड़ पर रस्सी से चारपाई का झूला बनाकर रह रहा है। इस भीषण गर्मी में घर से दूर खेत में प्रवासी मजदूर लू के थपेड़े खाकर भी परिवार और गांव को सुरक्षित रखने के लिए क्वारंटीन है।
पिंटू मीणा ने बताया कि वह अहमदाबाद में व्यवसाय करता है। लॉकडाउन के कारण वह पिछले दिनों तिमावा लौट आया। यहां आने के बाद स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और फिर उसे चिकित्सा विभाग ने 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन कर दिया। उसने गांव व परिवार के स्वास्थ्य की खातिर घर रहना मुनासिब नहीं समझा और गांव से 2 किलोमीटर दूर अपने खेत में स्थित पेड़ पर रस्सी से पलंग को लटकाकर झूला बनाया।
झूले पर ही उसका खाना-पीना और सोना हो रहा है। पिछले 7 दिन से वह नीम के पेड़ पर रस्सी से चारपाई का झूला डाल कर रह रहा है। पिंटू के बड़े भाई हरकेश मीणा ने बताया कि पिंटू को भोजन के टिफिन के साथ प्रतिदिन समय-समय पर पानी भी पहुंचा देते हैं। इसके बाद बर्तनों को पूरी तरह से सेनेटाइज कर लेते हैं। ताकि संक्रमण के खतरे की कोई संभावना नहीं रहे।