लॉकडाउन में घर आने के लिए 3 दिन तक भूखे पैदल चलते रहे पति और पत्नी, लखनऊ पहुंचे तो फूट पड़े उनके आंसू

तपती गर्मी और 40 डिग्री तापमान में आगरा एक्सप्रेस-वे टोल प्लाजा पर जैसे ही एक ट्रक पहुंचा तो उस ट्रक से भेड़ बकरियों की तरह मजदूर बाहर निकलने लगे। उस ट्रक में करीब 50 से अधिक लोग सवार थे। इस दौरान किसी की सांस फूल रही थी तो कोई गर्मी से परेशान था। कई मजदूरों के पांव सूज गए थे। इसके बावजूद टोल प्लाजा पर मौजूद पुलिस ने प्रवासी श्रमिकों को ट्रक से उतारकर न उन्हें शंकुतला मिश्रा विवि पहुंचाया और न ट्रक ड्राइवर के खिलाफ कोई कार्रवाई की।
कोरोना संक्रमण के कारण महानगरों में फंसे भूख प्यास से बिलबिला रहे प्रवासी मजदूर अब सरकार की सारी व्यवस्था को धता बताकर दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद सहित अन्य महानगरों से ट्रकों में भरकर बड़ी संख्या में अवैध रूप से अपने गांव व घरों को आने के लिए मजबूर हो गये हैं। इस दौरान न सोशल डिस्टेसिंग का पालन और न मास्क अथवा सैनिटाइजर का प्रयोग। सुबह से शाम तक आगरा एक्सप्रेस-वे टोल प्लाजा से सैकड़ों ट्रक व कंटेनर गुजरते रहते हैं लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता।

बिहार के सीवान जा रहे घनश्याम, मुन्नू लाल, राकेश कुशवाहा, रामकुमार ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से दिल्ली में रहना मुश्किल हो गया था। घर जाने के लिए काफी दिनों से कोशिश कर रहे थे लेकिन लॉकडाउन में ढील मिलते ही ट्रक ड्राइवर को तीन-तीन हजार रुपये में घर जा रहे हैं। वहीं टोल प्लाजा पर समाजसेवियों ने सभी प्रवासी मजदूरों को खाना और पानी उपलब्ध कराया।

बेंगलुरु में टाइल्स लगाने का काम करने वाले राज बहादुर अपनी पत्नी जानकी के साथ आठ दिन बाद गुरुवार को जब लखनऊ पहुंचे तो फूट-फूट कर रोने लगे। उन्होंने बताया कि कई दिन बाद आज अन्न खाने को मिला है। लॉकडाउन के दौरान बेंगलुरु से नागपुर तीन दिन भूखे पैदल चले। इसके बाद ट्रक वाले को दो हजार रुपये दिया। तब जाकर लखनऊ पहुंचे। उन्होंने बताया कि मालिक ने तनख्वाह भी नहीं दी है। आने वाले दिनों में और दुश्वारियां झेलनी पड़ेगी।

अहमदाबाद में स्टील की फैक्ट्री में काम करने वाले सूर्यकांत 10 दिनों की जद्दोजहद के बाद लखनऊ पहुंचे। इस दौरान उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पत्नी व चार बच्चों के साथ यहां तक आने में कभी ट्रक से सफर किया तो कभी किसी डाले में बैठकर आगे बढ़े। करीब 200 किलोमीटर तक परिवार सहित पैदल चलना पड़ा। इस दौरान रास्ते में किसी ने कुछ दे दिया तो खा लिया वरना भूखे रहना पड़ा। किसी तरह आज लखनऊ पहुंच गये हैं। पता चला है कि यहां से सरकार बस द्वारा बछरावां पहुंचाएगी।