केंद्र सरकार का फैसला, 4 मई से सरकार दे सकती है लॉकडाउन में फंसे लोगों को बड़ी राहत

कोरोना वायरस के खतरे के बीच देशभर में लॉकडाउन की अवधि को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। दरअसल इस वक्त देश में लॉकडाउन का दूसरा चरण चल रहा है। 3 मई तक चलने वाले लॉकडाउन के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल केंद्र सरकार ने 4 मई से लॉकडाउन के बीच एक बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। 3 मई को खत्म हो रहे लॉकडाउन के दूसरे चरण के बाद गृह मंत्रालय ने ऐसे लोगों को घर जाने की अनुमति दे दी है जो लॉकडाउन के कारण अपने घर से दूर या बाहरी राज्यों में फंसे हुए प्रवासी हैं। हालांकि, मंत्रालय ने अनुमति देने के साथ ही कुछ शर्तें भी रखी हैं।
कोरोना संकट के बीच देशभर में बढ़ाए गए लॉकडाउन की अवधि 3 मई रविवार को खत्म होने जा रही है। इसके साथ ही हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या लॉकडाउन बढ़ेगा या फिर खत्म होगा। इन्हीं सब अटकलों के बीच केंद्र सरकार ने 4 मई से राहत देने का एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के तहत जो लोग लॉकडाउन की वजह से अपने घरों तक नहीं पहुंच पाए हैं। उन्हें जाने की अनुमति दी जाएगी।

दरअसल लॉकडाउन के कारण कई प्रवासी मजदूर समेत छात्र-छात्राएं अपने घरों तक नहीं पहुंच पाए। जहां थे वहीं फंस गए है। ऐसे में 41 दिन के लंबे इंतजार के बाद उन्हें अपने घरों तक जाने की इजाजत दी जाएगी। हालांकि इसके लिए सरकार कुछ शर्तें रखी हैं। इस मामले में गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस बुधवार को जारी कर दी है। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह भी कहा कि 4 मई से अनेक जिलों में लॉकडाउन में काफी छूट दी जा सकती है।

बताया जा रहा है कि सरकार सोमवार 4 मई से ग्रीन जोन वाले इलाकों में छूट दे सकती है। मंत्रालय के मुताबिक बस से राज्य सरकारें लोगों को ले जाएंगी। राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस काम के लिए नोडल अथॉरिटी नामित करेंगे। ये अथॉरिटी अपने-अपने यहां फंसे लोगों का रजिस्ट्रेशन करेंगी। जिन राज्यों के बीच लोगों की आवाजाही होनी है, वहां की अथॉरिटी एक दूसरे से संपर्क कर सड़क के जरिए लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करेंगी।

जानिए किन लोगों को मिलेगी इजाजत

राहत के बीच नोडल अधिकारी एक प्रोटोकॉल बनाएगा। इसके तहत आने-जाने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। जिन लोगों में कोविड-19 के लक्षण नहीं पाए जाएंगे उन्हें ही इजाजत मिलेगी। प्रवासियों को लाने ले जाने के लिए जिन बसों को इस्तेमाल होगा उन्हें लगातार सैनिटाइज किया जाएगा। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी करवाया जाएगा। एक राज्य से निकले के पहले और पहुंचने के बाद दोनों वक्त मेडिकल ऑफिसर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगे।