लॉकडाउन में आदिवासियों के लिए मसीहा बनी यह महिला, बनवा दिए 500 टॉयलेट

देश में आज भी जनसंख्या एक बड़ी समस्या है जिसके कारण देश में सबसे ज्यादा दिक्कत और परेशानी शौचालय में आती है ऐेसे में कई संगठन है जिन्होंने इसके लिए बहुत से कदम उठाएं हैं लेकिन देश में अभी भी कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां पर शौचालय एक अहम समस्या है। देखा जाए तो देश की महिला किसी से कम नही है महिलाएं हर वो काम कर सकती है जो दूसरों को अंसभव लगता है। इस बार भी इस समस्या का हल एक महिला ने निकाला। 
जी हां हमारे बीच एक ऐसी महिला है जिन्होंने अकेले ही करीब 500 टॉयलेट बनवाए हैं और ये काम उन्होंने सालों में नही बल्कि कुछ ही महीनों में कर दिखाया। हम बात कर रहे हैं सेक्शनल फोरेस्ट ऑफिसर पीजी सुधा की, जिन्होंने यह काम कर दिखाया है, सुधा ने अकेले केरल के एर्नाकुलम जिले के 9 आदिवासी इलाकों में 497 शौचालय बनवाए हैं। उन्होंने यह काम महज तीन महीनों में किया है। सुधा 16 साल पहले राज्य वन विभाग से जुड़ी थीं और वो खुद आदिवासी इलाकों से आती हैं।
सुधा के अनुसार यह काम उनके लिए कोई आसान नहीं था। जब भी वो किसी ठेकेदार से ये काम करने के लिए कहती थीं तो वो मना कर देता था कारण कि इन इलाकों में सामान लाना और मजदूर उपलब्ध करवाना काफी मुश्किल था और फिर बाहर से सामान लाना कोई आसान काम नही था। सुधा को काम करने में काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। सुबह गशत पर जाना और फिर शाम को आना इन सारी बाधाओं को सुधा ने अपनी वीरता से खत्म किया।  इसी के साथ वह जंगलों जानवरों और शिकारियों पर भी नजर रखती है। 
सुधा कहती है कि यहां जीवन बेहद कठिन है क्योकि यहां बाकी क्षेत्रों के मुकाबले सुविधाएं भी कम है। यहां जाने के लिए ही तीन घंटे लग जाते है और पैदल ही जाना पड़ता है। उन स्थानों पर टॉयलेट बनाने के लिए ठेकेदार भी तीन गुना ज्यादा पैसे मांगते थे लेकिन उसके बाद उन्होंने आदिवासी लोगों के साथ मिलकर ही ये काम शुरू किया, रिपोर्ट्स की माने तो कई बार उन्हें खुद भी नाव में सामान ढोकर ले जाना पड़ता था। सुधा को इस काम के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है उन्हें 2006 में केरल के मुख्यमंत्री की ओर से बेस्ट फोरेस्ट गार्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया था।