जोश में निकाली बारात लेकिन हुआ कुछ ऐसा कि 60 दिन बाद रोते बिलखते हुए घर लौटे

एक-दो दिन नहीं बल्कि 60 दिन तक मेहमान-नवाजी कराने वाली अनोखी बारात का किस्सा कानपुर व आसपास के क्षेत्रों में खूब चर्चा का विषय बन गया है. यहां पर एक बारात लॉकडाउन की वजह से 60 दिन बाद अब वापस आ पाई. चौबेपुर के हकीम नगर गांव में उस वक्त मजमा लग गया जब 60 दिन बाद बारात वापस गांव लौटी अपनों के बीच पहुंचने के बाद ये बाराती और घर वाले मिलकर खूब बिलख-बिलख के रोये भी हालांकि ये आंसू ख़ुशी के थे.
दरअसल यहां के रहने वाले महमूद खान के पुत्र इम्तियाज का रिश्ता बिहार के बेगूसराय बलिया प्रखंड फतेहपुर गांव में मोहम्मद हामिद की भांजी खुशबू के साथ तय हुआ था. बारात लेकर गांव से मोहम्मद खान बिहार पहुंचे, 21 मार्च को शादी हुई और 22 मार्च को बारातियों की मेहमान नवाजी के बाद विदाई की तैयारी थी लेकिन 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के कारण बारात वहीं रुक गई और फिर देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा हो गई जिसके बाद से पूरा परिवार 9 बारातियों के साथ वहीं पर रुक गया.

बारातियों के कुछ दिन तो अच्छे गुजरे मगर कुछ दिन बाद बराती भी घर के सदस्य जैसे ही हो गए. लड़की के परिवार की भी आर्थिक हालत कुछ अच्छी नहीं थी, जैसे-तैसे रोटी-चटनी तो कभी सब्जी-चावल तो कभी दाल-चावल खाकर बारात ने दिन गुजारे. जब पूरी बारात के दूसरे प्रदेश में फंसने की खबर गांव पहुंची तो क्षेत्र के ही हिमांशु उर्फ गुड्डू ने केंद्र सरकार से गुहार लगाई और सभी को गाड़ी भेज कर लाया जा सका. इस बारात की वापसी देखने के लिए पूरे गांव में मजमा लग गया, सभी हैरत में थे कि आखिर 60 दिन तक कोई बारात कैसे रुक सकती है. 

चौबेपुर स्वास्थ्य केंद्र की टीम ने सभी बारातियों के स्वास्थ्य की जांच कर सभी को होम क्वारेन्टाइन कर दिया है. लड़के के पिता का कहना है कि लड़की की मां ने गांव में आसपास उधार लेकर जैसे-तैसे उनको इतने दिनों तक खाना खिलाया जबकि उनके आर्थिक हालात भी अच्छे नहीं थे. हालांकि अब बाराती घर तो जरूर आ गए हैं मगर मोहल्ले वाले ऐसी बारात से तौबा कर रहे हैं. वहीं क्षेत्र के रहने वाले एक समाजसेवी का कहना है कि क्षेत्र के सभी लोगों ने सहयोग करके बस करके पैसे इकट्ठा करके इन बारातियों को यहां पर बुलाया है जिसके लिए सभी बधाई के पात्र हैं.