लॉकडाउन में लुधियाना से साइकिल पर 700 Km. का सफर पूरा कर लखीमपुर खीरी पहुंचे, और बेसुध हो गिर पड़े

बलरामपुर के रहने वाले ये मजदूर जब साईकिल पर सवार होकर अपने घर बलरामपुर के लिए निकले तो ना ही किसी का दिल पसीजा और ना ही किसी को तरस आया. जैसे जैसे ये 700 किलोमीटर का सफर तय कर लखीमपुर पहुंचे ये बेसुध हो चुके थे. शहर के बाहर हाईवे पर मौजूद एक होटल के बाहर रोशनी दिखी तो सोचा यही रात गुजार लें. वे वहीं भूखे और प्यासे ही लेट गए. 
तभी इधर से गुज़र रहे शहर के समाजसेवी मोहन बाजपेयी की इनपर नजर पड़ी. मोहन बाजपेयी ने घर से चाय बिस्कुट फल वगैरह लाकर उन्हें मुहैया कराया. पेट की आग इस कदर थी कि सारे मजदूरों को मानों कोई मसीहा मिल गया हो, लेकिन प्रसाशन का कोई नुमाइंदा ना इन तक पहुंचा और ना इनकी सुध ली.

700 किलोमीटर लुधियाना से लखीमपुर तक का सफर करके साइकिल पर अपने छोटे छोटे बच्चों से साथ सफर कर आ रही सरिता का कहना है कि रास्ते में बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ा. लोगों ने खाना भी खिलाया जिसके सहारे हम सब लखीमपुर तक पहुंचे हैं लेकिन शासन और प्रशासन की कहीं कोई मदद नहीं मिली. अभी 200 किलोमीटर आगे और बलरामपुर जाना है और यह बचा हुआ सफर भी हम जैसे तैसे सफर पूरा कर ही लेंगे.

लखीमपुर खीरी के समाजसेवी मोहन बाजपेयी ने बताया किसी ने उनको फोन पर जानकारी दी की 40—50 लोग छोटे-छोटे बच्चों के साथ सफर कर रोड पर भूख से बेहाल बैठे हैं. वह लगातार पिछले 30 दिनों से भूखे लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं. वे तत्काल इन यात्रियों को ढूंढने निकल पड़े और इनके लिए भी घर से चाय और बिस्कुट, केले लेकर मौके पर आए.