लॉकडाउन में इस लड़के को रिश्तेदार ने घर से निकाला, पार्क में कई दिन तक भूखा रहा और फिर बदल गया किस्मत

कोरोना संक्रमण को देखते हुए भारत में देशव्यापी लॉकडाउन लगा दिया गया। इस लॉकडाउन के दौरान कई ऐसे फोटो वीडियो और घटनाएं देश के सामने आई। जो सभी लोगों को झकझोर देती हैं। कहीं गोद में मासूम बच्चे को लिए मां पैदल ई कई किलोमीटर की यात्रा कर अपने घर जाते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। तो कहीं ब्रीफकेस पर अपनी छोटे बच्चे को सुला कर खींचते हुए मां सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। मध्यप्रदेश में बैल के साथ खुद को बांध के अपने परिवार को ले जाता युवक भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा।
वहीं बिहार की ज्योति 1200 किलोमीटर की यात्रा कर अपने पिता को साइकिल पर बैठा कर लॉक डाउन में वायरल हो रही हैं। कोरोनाकाल में जहां अनेक प्रकार से दुनिया भर में लोग प्रभावित हैं वहीं संकट की घड़ी में अपने पराए की पहचान भी हो रही है। इसी बीच दिल्ली के द्वारका में माता पिता अपने 13 साल के मासूम को अपने रिश्तेदार के पास छोड़कर लॉकडाउन से पहले दिल्ली से चला गया था जिसके बाद उस मासूम को रिश्तेदार ने घर से निकाल दिया और उस बच्चे को कई दिन तक पार्क में रहकर दिन गुजारने पर मजबूर होना पड़ा।
माता-पिता जिसके पास 13 साल के बच्चे को विश्वास करके छोड़ गए थे, उसने लॉकडाउन में बच्चों को निकाल बाहर किया। बच्चा कई दिन तक भूखा प्यासा पार्क में रहा। कुत्तों को पार्क में रोटी खिलाने पहुंची एक महिला की नजर जब बच्चे पर पड़ी तो मामले का भांडा फूटा। फिहलाह उड़ीसा कैडर के एक आईपीएस अधिकारी की मदद से अब बच्चा माता-पिता से मिल चुका है।
घटना दिल्ली के द्वारका इलाके की है। बच्चे के बारे में उड़ीसा कैडर के जिस आईपीएस अधिकारी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था उनका नाम अरुण बोथरा है। अरुण बोथरा, बच्चा कई दिन तक पार्क की बेंच पर ही लेटा-बैठा रहा। जब पार्क में कुत्तों को रोटी खिलाने जाने वाली महिला की नजर बच्चे पर पड़ी, तो वे उसे खाना खिलाती रहीं।
उसके बाद एक एनजीओ की और सोशल मीडिया की मदद ली गई। जिसमें कामयाबी मिल गई। जैसे ही परिवार को पता चला वो बच्चे से मिलने दिल्ली पहुंच गया। हालांकि, बच्चे का परिवार समस्तीपुर में था। आईपीएस अधिकारी संजय ने बच्चे के परिवार को पटना पहुंचाने का इंतजाम किया। फिलहाल बच्चा और परिवार अब साथ साथ हैं।