बस से पहले आ गई मौत, सीतापुर जा रहे प्रवासी मजदूर की बेटी को ट्रक ने रौंद दिया

मैनपुरी के थाना किशनी क्षेत्र में मंगलवार सुबह दर्दनाक हादसा हो गया। हरियाणा से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जा रहे प्रवासी मजदूर की छह वर्षीय पुत्री को तेज रफ्तार ट्रक ने रौंद दिया। इससे बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रक की टक्कर से पुलिस का बैरियर भी टूट गया। सड़क किनारे मौजूद अन्य परिजन बाल-बाल बचे। सीतापुर जिले के थाना रामकोट के गांव बबूरी निवासी शिवकुमार अपने परिवार के साथ हरियाणा के गुरुग्राम में मजदूरी करते हैं। 
लॉकडाउन के चलते कामकाज बंद होने पर शिवकुमार 18 मई की शाम पत्नी सीमा, बड़ी बेटी कविता, छह वर्षीय छोटी बेटी प्रियंका, भाई कमलू, आरती पत्नी कमलू, साला अंकित व साले की पत्नी ललिता के साथ घर जाने के लिए एक ट्रक में सवार होकर निकले। किशनी थाना क्षेत्र के तहत खिदरपुर बॉर्डर के पास बैरियर पर मंगलवार सुबह करीब पांच बजे पुलिसकर्मियों ने ट्रक को रोककर उसमें सवार करीब 18 मजदूरों को उतार लिया। सभी मजदूरों को सड़क किनारे बिठा दिया गया। 

पुलिसकर्मी मजदूरों को रवाना करने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे, तभी सुबह करीब साढ़े सात बजे एक तेज रफ्तार ट्रक ने पुलिस के बैरियर को तोड़ते हुए प्रियंका को चपेट में ले लिया। हादसे में प्रियंका की मौके पर ही मौत हो गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने पीछा करके ट्रक को कब्जे में ले लिया, लेकिन चालक भाग निकला। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। थानाध्यक्ष ओमहरि वाजपेयी ने बताया कि ट्रक को कब्जे में ले लिया गया है। चालक की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पिता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।

कमाया कुछ नहीं, बेटी को खो दिया 

सड़क हादसे में प्रियंका की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मच गया। मां-बाप सहित अन्य परिजन बेसुध हो गए। किसी तरह वहां मौजूद अन्य श्रमिकों ने उन्हें संभालने की कोशिश की। शिवकुमार रोते हुए सिर्फ यही कह रहा था कि लॉकडाउन ने उसकी बेटी को छीन लिया। परदेश में वह कमाने के लिए आया था। रुपया पैसा तो कुछ नहीं कमाया, अपनी बेटी को हमेशा हमेशा के लिए खो दिया। बेसुध परिजनों को देखकर वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें नम हो गईं। 

हादसे के वक्त बच्ची के परिजनों सहित करीब 24 श्रमिक सड़क किनारे बैठकर प्रशासन की ओर से मुहैया कराई गई बस का इंतजार कर रहे थे। अधिकांश मजदूर यहां सुबह करीब पांच बजे वाहनों से उतारे गए थे, लेकिन उनके लिए समय से बस का इंतजाम नहीं हो सका। अगर समय से बस उपलब्ध कराकर प्रशासन मजदूरों को रवाना कर देता तो शायद यह हादसा नहीं होता।