लॉकडाउन में कोई हुआ बेहोश तो किसी ने सड़क किनारे ही बना लिया अपना बिस्तर

ब्रजघाट गंगानगरी में उमड़ी हजारों प्रवासी श्रमिकों की भीड़ को सुबह से लेकर शाम तक चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़े झेलने पड़े। आवागमन के दौरान कोई बेहोश होकर सड़क किनारे गिर पड़ा, तो कोई पुल पार करने से रोके जाने पर परेशान हुआ। किसी ने बजरी को ही सोने का बिस्तर बना लिया। चलिए हम आपको बताते हैं लॉकडाउन में मजदूरों की स्थिति के बारे में...
दिल्ली लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर चिलचिलाती धूप के बीच जा रहा एक प्रवासी मजदूर रविवार की दोपहर को ब्रजघाट चैकपोस्ट के सामने पहुंचते ही साइकिल समेत जमीन पर गिर पड़ा, जिसने कुछ देर बाद होश आने पर बताया कि वह बिहार के गोपालगंज जनपद का निवासी अर्जुन है। जो हरियाणा के भिवानी जनपद के गांव तौसाम में किसान के पास कामकाज करता था और अपने वेतन की एवज में किसान से साइकिल लेकर घर को लौट रहा था। आसपास के लोगों ने किसी तरह उसकी मदद कर पानी पिलवाया।

हाइवे सड़क किनारे पड़ी बजरी पर गहरी नींद में सो रहे दो लोगों को जगाकर जानकारी की तो उन्होंने बताया कि वह बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले सुखदेव और तुलसी हैं, जो हरियाणा के सोनीपत जनपद में रिक्शा चलाते थे। लॉकडाउन आगे बढ़ने पर उनके सामने घर लौटने के सिवा कोई चारा नहीं था। परंतु ठेली से लंबा सफर तय करने के बाद भी अमरोहा पुलिस गंगा पुल पार नहीं करने दे रही है।

बस का इंतजार करते हुए ब्रजघाट के पार्किग स्थल में तड़के से बैठे प्रवासी श्रमिक दोपहर होते ही चिलचिलाती धूप और गर्म हवा के थपेड़ों से बेहाल होने लगे। गर्मी के कारण महिलाओं और बच्चों को काफी परेशान होना पड़ हा था। कई प्रवासी श्रमिकों ने ओढ़ने और बिछाने वाले अपने कपड़ों को ही धूप से बचाव का माध्यम बनाया। हर कोई धूप से परेशान था और बस मिलने का इंतजार कर रहा था।