सूरत से पैदल चलते थक गया तो रास्ते में ही खरीद लिया साइकिल

फूलपुर तहसील के ओरिल गांव रामकेवल गुजरात के सूरत शहर में रहता था। लॉकडाउन में फंसने पर सूरत से पैदल ही घर के लिए चल दिया था। तीन दिन पैदल चलते रास्ते में थक गया तो 12 सौ रुपये में साइकिल खरीद कर घर की ओर निकल पड़ा। इस बीच रास्ते में गुजरात पुलिस ने पकड़ कर साइकिल को जप्त कर वापस सूरत भेज दिया। 10 मई को 850 रुपये जमा कर ट्रेन से किसी तरह से वह घर पहुंचा। रास्ते की स्थिति लोगों से वया कि तो रोंगटे खड़े हो गए।
फूलपुर तहसील क्षेत्र के ओरिल गांव निवासी रामकेवल प्रजापति चार साल से गुजरात के सूरत शहर में एक फैक्ट्री में साड़ी डिजाइनिंग का काम करता है। मार्च माह में लॉकडाउन हो जाने से फैक्ट्री बंद कर दी गई। धीरे-धीरे जमा पैसा खत्म होने लगा। कमरे में रखा राशन भी खत्म हो गया। भूखो मरने की नौबत आने लगी,तो रामकेवल 20 अप्रैल को कपड़ा आदि समेट कर पैदल घर के लिए निकल पड़ा। उसे उम्मीद थी कि प्रशासन मदद कर घर पहुंचा देगा। तीन दिन लगातार भूखे ,प्यासे पैदल चल कर वह 23 अप्रैल की सुबह गुजरात के हलोल नामक स्थान पर पहुंचा। 

अब उसके पैर जबाब दे गए थे। पैर में छाले पड़ गए थे। उसके पास मात्र 15 सौ रुपये बचे थे। पैदल न चल पाने की स्थिति में रामकेवल ने एक साइकिल की दुकान से 12 सौ रुपये में पुरानी साइकिल खरीदी और किसी तरह हिम्मत कर घर की ओर चल दिया। दो दिन साइकिल से चलने के बाद 25 अप्रैल को दहोद पहुंचा। यहां पहुंचते ही गुजरात के प्रशासन अधिकारियों के साथ पुलिस ने उसे रोक दिया। पुलिस ने रामकेवल की साइकिल जप्त कर ली और कहा कि लॉकडाउन खुलेगा तो आकर अपनी साइकिल ले जाना।

प्रशासनिक अधिकारियों ने एक वैन से उसे वापस सूरत भेज दिया। आश्वासन दिया कि ट्रेन से आप को घर भेजा जाएगा। सूरत पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन के लोगों ने पंडाले पुलिस चौकी में घर जाने के लिए एक फार्म भरवाया। एक सप्ताह तक कोई सूचना नहीं मिली। प्रशासन के रवैया से तंग आकर रामकेवल एक स्थानीय नेता से मिला अपनी व्यथा बताते हुए घर भेजने के लिए सहयोग मांगा। नेता के सहयोग से 10 मई को 850 रुपये जमा करने के बाद ट्रेन से घर के लिए रवाना हुआ। घर पहुंचने के बाद वह होम क्वारंटीन है। पैदल व साइकिल से चलने की दस्ता रामकेवल लोगों से वया करता है ,तो लोगों के रोगटें खड़े हो जाते हैं।