कोरोना के इस जंग में इन मासूमों का आखिर क्या कसूर...

टेंट तंबू में मां अपने बच्चों को घर पहुंचने का दिलासा दे रही थी। उधर बच्चों के पिता अपने बच्चों को घर तक पहुंचाने के लिए पूछताछ केंद्र से लेकर अफसरों तक चक्कर लगाकर जानकारी जुटा रहे थे। ऐसा नजारा मथुरा रोड स्थित खेल स्टेडियम में देखने को मिला। यहां राजस्थान पहुंचे प्रवासी मजदूर अपने अपने जिलों में जाने के लिए बेताब दिखे। 
खाने का पैकेट लोकर बच्चों की भूख मिटाने की कोशिश भी जारी थी। मां अपने आंचल में बच्चों को संभालने में जुटी हुई थी।दोपहर के 12 बजे थे, धूप अपने पूरे चरम थी। सर पर तपती धूप की गर्मी में इन टेंटों में मां अपने बच्चों धूप की गर्मी में राहत देने की कोशिश में जुटी हुई थी। अफसर अपने अपने प्रयासों में जुटे हुए दिख रहे थे। ग्राउंड में बसों को खड़ा करा दिया गया था। लोग अपने अपने क्षेत्रों के लिए रवाना होने वाली बसों की ओर निगाहें लगाए हुए बैठे थे।

इन दृश्यों ने हर एक के अंदर तमाम तरीके के सवाल खड़े कर दिए। वहीं अब यहां जिला प्रशासन इन प्रवासी मजदूरों को अपने अपने घरों को भेजने में जुटा हुआ है। वहीं अब इन लोगों को फिर से काम तलाशने के साथ साथ नए सिरे से जिंदगी को शुरू करने को लेकर तमाम सवाल खड़े हुए हैं। कुछ प्रवासी मजदूरों ने बताया कि अब सबसे पहले घर पहुंचने की जल्दी है, ताकि हम अपने बिखरे हुए परिवारों को जोड़ सके। उसके बाद ही आगे की सोची जाएगी।