जुड़वा बच्चे हैं हमारी जान तो इन दोनों को कैसे उतारूं गोद से...

हर मां की जान होती है उसकी संतान। मां भले ही भूखी रहे लेकिन अपने बच्चों को कभी कष्ट नहीं होने देती है। मां की ममता का कोई मोल नहीं, वह अनमोल होता है। ऐसा ही नजारा रेलवे स्टेशन पर रविवार को दोपहर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से जुड़वा बच्चों संग उतरी एक मां की गोद में देखने को मिला। मां की ममता यह रही कि वह पहले अपने दोनों जुड़वा बच्चों की जांच कराया तब अपनी जांच कराई और आगे बढ़ गई लेकिन खाने की चिता नहीं थी उसे। 
वह लंच पैकेट भी नहीं ली। कहा कि दोनों जुड़वा बच्चे हमारी जान हैं। इनके आगे खाना पीना कुछ भी माने नहीं रखता है। प्रशासन की तरफ से लगे कर्मचारियों ने पीछे आ रही महिला के घरवालों को लंच पैकेट के साथ ही पानी की बोतल भी दिया। जौनपुर निवासी महिला का नाम रानी जो अपने पति के साथ सूरत में रहती थी। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन होने के कारण पचास से अधिक दिनों तक अपने घरों के अंदर रहने के बाद भी अपने दोनों जुड़वा मासूम बच्चों को सीने से लगाए रखा। रानी ने बताया कि दोनों बच्चे हमारी जान हैं। 

इनके बिना हम कुछ नहीं है। कहा कि हम लोग चावल व कभी लाई चना खाकर दिन बिता लेते थे लेकिन बच्चों को दूध की कमी नहीं होने देते थे। लॉकडाउन के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन इन दोनों बच्चों के आगे सब भूल जाती थी। लंच पैकेट के नाम पर बताया कि बच्चों को गोद में लिया था। ऐसे में लंच पैकेट लेने के लिए हाथ तो खाली होना जरूरी था। बताया कि हमें अपने जुड़वा बच्चों की चिता रहती है और उनका पूरा ख्याल रखती हूं। हमें अपनी चिता नहीं रहती है। रही बात खाने की तो कोई बात नहीं जैसे 51 दिन बिताया वैसे चार घंटे तक भूखी रह लूंगी। बस हम किसी तरह से अब अपने गांव पहुंच जाएं।