महाराष्ट्र में प्लाज्मा थेरेपी से गुजरने वाले पहले कोरोना पीड़ित मरीज की हुई मौत

कोरोना के इलाज के लिए कारगर बताए जा रहे प्लाज्मा थेरेपी को लेकर निराश करने वाली खबर सामने आई है। दरअसल महाराष्ट्र में प्लाज्मा प्लाज्मा थेरेपी से गुजरने वाले पहले कोविड-19 मरीज की लीलावती अस्पताल में बुधवार रात मौत हो गई।  53 साल के मरीज की हालत गंभीर थी और उसे आईसीयू में रखा गया था।
19 अप्रैल को मरीज की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद 20 अप्रैल को अस्पताल ला गया था। डॉक्टरों की माने तो मरीज की पहचान होने में देर हुई जिसकी वजह से पहले ही श्वसन सिंड्रोम विकसित हो गया था। हालांकि, मरीज के अस्पताल पहुंचते ही उसे  आईसीयू में भर्ती कर दिया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, गले में खराश, सूखी खांसी और बुखार जैसे लक्षण होने के बावजूद उन्होंने अपने इलाज में देरी की।

मरीज का कोई यात्रा इतिहास नहीं रहा और किसी कोरोना मरीज से डायरेक्ट संपर्क नहीं था इसलिए ऐसा हुआ क्योंकि मरीज को लगा कि सब नॉर्मल है। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने कहा कि जब मरीज को अस्पताल लाला गया, तो उसकी हालत पहले से ही बेहद खराब थी। उपचार में देरी के कारण सांस लेने में गंभीर समस्या थी। 25 अप्रैल को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) से हरी झंडी मिलने के बाद राज्य में पहला प्लाज्मा थेरेपी की गई। 

इस तरह से यह मरीज राज्य के लिए उम्मीद की किरण जैसा था क्योंकि राज्य में प्लाज्मा थेरेपी का क्लीनिकल ट्रायल किया गया था। पहले दिन 200 एमएल प्लाज्मा चढ़ाया गया था। जिसके बाद थोड़ा सुधार हुआ था। लेकिन 27 अप्रैल की सुबह मरीज की सेहत फिर से बिगड़ने लगी। डॉ रविशंकर ने कहा कि उसको एंटीबायोटिक दवाओं की डोज भी दी गई। डॉक्टर ने कहा कि हमें मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए अगले दो ट्रायल को स्थगित करना पड़ा है।