कोरोना के समय तीनों भाई बहन फर्ज निभाने के साथ ही अस्पताल में ही करते हैं सहरी, दुआओं में मांगते हैं वैक्सीन

लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। इस बीच कोरोना कर्मवीर अपने कर्तव्यों का इमानदारी से पालन कर रहे हैं। इन्हीं में शामिल हैं स्वास्थ्यकर्मी। रमजान में 12 से 14 घंटे की ड्यूटी करना आसान नहीं है लेकिन कमर खान और शबनम ने ऐसा करके दिखा दिया है। उनकी एक और बहन नर्स है। तीनों भाई—बहन अपना फर्ज निभाने के साथ ही अस्पताल में सहरी करते हैं।
सेक्टर—21 में रहने वाले कमर खान सेक्टर 30 स्थित जिला अस्पताल में फार्मासिस्ट हैं। उनकी बहन का नाम शबनम है। वह नर्स के तौर पर बिसरख सीएचसी में तैनात है। इस समय उसकी ड्यूटी कोरोना आइसोलेशन वॉर्ड में है। दोनों ही पांचों वक्त के नमाजी हैं। इनकी एक और बहन नर्स है। उनकी तैनाती झांसी मेडिकल कॉलेज में है। घर में उनके माता—पिता रहते हैं। रमजान में ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरा परिवार दूर—दूर है। ऐसे समय में पूरा परिवार वीडियो कॉल के जरिए एक—दूसरे से जुड़ा रहता है।
32 साल के कमर खान का कहना है कि ओपीडी बंद है। इमरजेंसी में उनकी ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने रमजान में अब तक पांचों वक्त की नमाज अदा की है। ऐसे हालात में वे दुआओं में किसी दवा या वैक्सीन को मांग रहे हैं। वीडियो कॉल के जरिए पूरे परिवार के साथ इफ्तारी हो जाती है लेकिन सहरी अस्पताल में होती है। रात में उनकी ड्यूटी लगी है। अगर उन्हें मौका मिलता है तो वह वॉर्ड में ही फजर की नमाज अदा कर लेते हैं।
कमर की बहन शबनम की ड्यूटी बिसरख सीएचसी में बने आइसोलेशन वॉर्ड में है। वह किसी तरह वक्त निकालकर पांचों वक्त की नमाज अदा कर लेती हैं। 12 घंटे तक उनको मरीजों की सेव्रा में तैनात रहना पड़ता है। उनकी ड्यूटी रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक की है। कभी—कभी ड्यूटी का समय बढ़ भी जाता है। वह दुआ में भाईचारे और वतन के के हर शक्स की सलामती मांगती हैं।