गांव में फंस गए पिता तो मुंबई से घर के लिए चल दीं ये तीन बहनें

घर की माली हालत ठीक नहीं होने पर देवरिया जिले की रहने वाली तीन बहनें पिता के साथ मुंबई में मजदूरी करने लगीं। लॉकडाउन में पिता गांव में फंस गए तो तीनों बहनें हिम्मत कर गांव के लिए निकल पड़ी। हालांकि सहजनवां के कसरवल में ट्रक चालक ने नीचे उतार दिया। इसके बाद वे परेशान होकर भीटी रावत पहुंचीं और वहां के लोगों से समस्याएं बताई। सूचना पर तहसील प्रशासन ने तीनों को वाहन से गांव के लिए भेज दिया।
देवरिया जिले के बरपुरवा निवासी फागू मुंबई में रहकर मजदूरी करते हैं। उनके साथ उनकी तीन पुत्रियां भी हाथ बंटाने के लिए मुंबई पहुंच गईं। वहीं पर पिता के साथ रहने लगीं। मार्च में जरूरी काम से पिता गांव आ गए और लॉकडाउन के चलते वापस नहीं जा सके। परदेस में कोई अपना नहीं होने से तीनों बहनें घबराने लगीं। हालांकि हौंसला रखा और 9300 रुपये भाड़ा देकर ट्रक से 14 मई को देवरिया के लिए निकल पड़ी, जिसमें बस्ती के भी कुछ लोग सवार थे। ट्रक चालक सहजनवां तहसील के कसरवल चेकपोस्ट पर पहुंचने के बाद तीनों बहनों मधु, दुर्गा तथा काजल को नीचे उतारकर चल दिया। तहसीलदार एलजी विश्वकर्मा ने बताया कि मुरारी इंटर कालेज में जांच के बाद तीनों को भोजन कराया गया। उसके बाद गांव के लिए बस पर बैठाकर भेज दिया गया। 

ट्रकों से आ रहे परदेसी, नहीं लग रही रोक

शासन के आदेश के बाद भी प्रवासी ट्रकों पर सवार होकर घर लौट रहे हैं। प्रशासन कालेसर जीरो प्वाइंट से उन्हें बसों के जरिये गंतव्य तक भेजा रहा है। हालांकि तमाम माल वाहक अफसरों के सामने से मजदूरों को लेकर निकल गए, लेकिन किसी ने उन्हें टोका तक नहीं। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम अनुज मलिक ने कहा कि कालेसर के पास से लोगों को बसों में बैठाकर भेजा जा रहा है। परदेसियों को लाने वाले ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है।