मोहिनी एकादशी : व्रत रखने वाला सभी आज के दिन कदापि न करें ये काम...

04 मई वैसाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दिन सोमवार को मोहिनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। यूं तो हिंदू धर्म में पड़ने वाली प्रत्येक एकादशी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है परंतु चूंकि वैसाख मास श्री हरि के सबसे प्रिय महीनों में से एक है इसलिए इस माह का तो प्रत्येक दिन विशेष महत्व होता है। वहीं अगर बात इस मास की एकादश तिथि की हो तो इसकी विशेषता का तो कोई सार ही नही है। 
यही कारण है हर कोई इस दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करता है ताकि इनकी कृपा प्राप्त हो सके। मगर कई बार व्रती जाने-अनजाने में कुछ ऐसे कार्य कर देता है जिन्हें करने से उसके शुभ नहीं अशुभ फलों की प्राप्ति होने लगती है। ज्योतिष शास्त्र में इन कामों के बारे में वर्णन किया गया है कि इस दिन व्रचत रखने वाले, श्री हरि की पूजा आदि करने वाले शख्स को कौन से काम करने से परहेज रखना चाहिए। चलिए जानते हैं क्या है व बातें जिनके बारे में एकादशी का व्रत रखने वाले को पता होना चाहिए-

मोहिनी एकादशी तिथि के दिन इन कार्यों को करने से बचें
यूं तो रात्रि सोने के लिए होती है परंतु कहा जाता है एकादशी तिथि की रात को शयन करने की बजाए पूरी रात्रि बैठकर भगवान विष्णु की भक्ति, मंत्र जप और भजन करना चाहिए, इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

● चुगली

कुछ लोगों की आदत होती है कि वो एक की बात उधर तो दूसरे की बात इधर करते हैं। कहा जाता है एकादशी तथा एकादशी के अलावा भी किसी भी दिन ये कर्म नहीं करना चाहिए। इससे मान-सम्मान में तो कमी आती है, कई बार तो इसकी वजह से अपमान का सामना भी करना पड़ता है। इसके अलावा दूसरों की बुराई करना अर्थात परनिंदा करने से भी पूजा आदि का सभी फल नष्ट हो जाता है।  

● चोरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी पावन तिथि को चोरी करना किसी पाप से कम नहीं माना जाता है। इससे न केवल व्यक्ति परिवार व समाज में घृणा की नज़रों का शिकार होता है बल्कि पाप का भागीदार बन जाता है।

● हिंसा

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बहुत खास माना जाता है। इसका महत्व इतना है कि कहा जाता है कि जो भी जातक इस दिन व्रत आदि करता है वे अपने ससम्त प्रकार के पापों से मुक्ति पा लेता है। मगर अगर कोई व्यक्ति इस दिन किस  तरह की हिंसा करता है तो उसे महापापी की उपाधि दी जाती है। बता दें ज़रूरी नहीं कि हिंसा केवल शरीर से ही नहीं मन से भी होती है। जिससे मन में विकार पैदा होते हैं। इसलिए इस दिन शारीरिक या मानसिक प्रकार की हिंसा न करें।

● स्त्रीसंग

प्रचलित किंवदंतियों के अनुसार जो व्यक्ति एकादशी का व्रत रखता है उसके लिए स्त्रीसंग करना वर्जित माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे मन में विकार उत्पन्न होता है। जिस कारण जातक अपनी पूजा में एकाग्रता नहीं ला पाता। इसलिए कहा जाता है कि ग्यारस के दिन स्त्रीसंग नहीं करना चाहिए।