लॉकडाउन में फंस गया बेटा, उधर पिता की हो गई मौत

कोरोना कैसे -कैसे दिन दिखाएगा। लॉक डाउन में बेटा गुजरात में फंसा रहा और इधर बीमार पिता की सांसें थम गईं। पति की मौत और बेटे से दूरी ने मां को भी बीमार कर दिया।ईसानगर ब्लॉक के परसिया गांव के सोनू सिंह के कंधों पर जिम्मेदारियों का भारी बोझ था।
बीमारी से जूझ रहे बुजुर्ग माता-पिता का इलाज और बहन की शादी करनी थी। गांव में रोजगार न होने की वजह से सोनू गुजरात कमाने चला गया। पिछले करीब 10 सालों से सोनू गुजरात में नौकरी करके घर चला रहा था। इस बीच कोरोना संकट में लॉक डाउन हो गया तो सोनू गुजरात में ही फंसा रह गया।

लाख जतन के बावजूद भी सोनू घर नहीं आ सका। इधर पहले से बीमारी का सामना कर रहे सोनू के पिता नगीना सिंह की सांसों की डोर टूट गई। सोनू अपने पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सका। सोनू का छोटा भाई मोनू लखनऊ में मजदूर करता था। जो पिता की मौत पर किसी तरह घर पहुंचा और पिता का अंतिम संस्कार किया। इधर पति की मौत और बेटे की जुदाई के गम में सोनू की मां मधु सिंह की भी तबियत खराब हो गई। 

चारपाई पर पड़ी मधु हर वक़्त बेटे को पुकारती रहती हैं। लॉक डाउन और ऊपर से आर्थिक किल्लत से मधु सिंह को भी इलाज नहीं मिल पा रहा है। सोनू के परिवार की हालत देख गांव का एक युवक अताउल्ला अंसारी मदद को आगे आया। जिसने नगीना सिंह और मधु सिंह को अस्पताल पहुंचाकर उनका इलाज और जांचें कराई। साथ ही गांव में रहकर सुबह शाम दवा खिलाने पहुंचता है।